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गुजरात: तेज रफ्तार डंपर ने मवेशियों को कुचला, कथित नेता के रवैये से किसानों में आक्रोश
- Photo by : social media
संक्षेप
गुजरात: अहवा डांग सापुतारा स्टेट हाईवे पर मोटा चर्या गांव के पास बीते दिन एक दर्दनाक हादसा हुआ।
विस्तार
गुजरात: अहवा डांग सापुतारा स्टेट हाईवे पर मोटा चर्या गांव के पास बीते दिन एक दर्दनाक हादसा हुआ। तेज रफ्तार से आ रहे एक डंपर चालक ने सड़क पार कर रहे मवेशियों के झुंड को कुचल दिया, जिससे कई गाय और बैल गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद किसानों में भारी आक्रोश फैल गया, लेकिन इस गंभीर मामले में ग्राम पंचायत सदस्य होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति ने जो रवैया अपनाया, उसने किसानों के गुस्से में घी डालने का काम किया है। घटनास्थल पर जब पीड़ित किसान अपने नुकसान के लिए न्याय की मांग कर रहे थे, तब मोटा चर्या गांव के कथित नेता दिलीपभाई गंगारामभाई पवार द्वारा किसानों को ही धमकाने के आरोप लगे हैं। दिलीप पवार ने किसानों को सहानुभूति देने के बजाय उद्दंड तरीके से कहा, "हमारे पास भी वाहन हैं, हम भी रोड टैक्स भरते हैं, इसलिए हमें कानून पता है। तुम्हें जहां जाना है जाओ, ट्रक डंपर चालक का कुछ नहीं बिगड़ेगा।" इस बयान के बाद स्थानीय लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या गरीब किसानों या पशुओं को सड़क पर चलने का कोई अधिकार नहीं है 'भाभी राज' और सत्ता का दुरुपयोग ग्रामीणों के अनुसार, दिलीपभाई पवार खुद ग्राम पंचायत सदस्य होने का दावा करते हैं, लेकिन वास्तव में वे उस पद पर नहीं हैं। वे पिछले 10 वर्षों से अपनी भाभी के नाम पर 'भाभी राज' चला रहे हैं और पर्दे के पीछे रहकर गांव पर हुक्म चलाते हैं। चर्चा है कि हादसे के समय भी उन्होंने ट्रक चालक और मालिक का पक्ष लिया और बेजुबान पशुओं को खोने वाले अनपढ़ किसानों को दबाने का प्रयास किया। समझौते के नाम पर 'दलाली' का आरोप गांव वालों का गंभीर आरोप है कि दिलीप पवार ने किसानों को उचित मुआवजा दिलाने के बजाय ट्रक मालिक के साथ साठगांठ कर ली और बहुत ही कम रकम (पानी के भाव) में समझौता करवा दिया। लोगों के बीच चर्चा है कि उन्होंने न्याय दिलाने के बजाय अपनी सत्ता का दुरुपयोग कर एक बिचौलिए की भूमिका निभाई है। ग्रामीणों का आक्रोश: "जिन किसानों ने अपने कमाऊ बैल और गाय खोए हैं, उन्हें न्याय दिलाने के बजाय सत्ता के नशे में कानून पढ़ाना शर्मनाक है। आने वाले दिनों में गांव के लोग इस भ्रष्टाचार और अन्याय का हिसाब जरूर लेंगे।" इस घटना के बाद डांग के सुदूर इलाकों के किसानों में भारी असंतोष है। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इस मामले की जांच करेगा या ऐसे कथित नेता गरीबों की आवाज को इसी तरह दबाते रहेंगे।
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