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मध्य प्रदेश: भीषण गर्मी में सेवा का मिसाल: बहनों ने पक्षियों-पशुओं के लिए दाना-पानी और चारा देकर जीता दिल

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 04/05/2026 03:33:45 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
  • Edited By.: Kunal,
  • Date:
  • 04/05/2026 03:33:45 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पोरसा में भीषण गर्मी के बीच जहां इंसान ही नहीं, बल्कि पक्षी और पशु भी पानी और भोजन के लिए तरस रहे हैं, वहीं जैन मिलन महिला वीराग पोरसा और जैन मिलन बालिका मंडल पोरसा की बहनों ने जीव दया

विस्तार

मध्य प्रदेश: पोरसा में भीषण गर्मी के बीच जहां इंसान ही नहीं, बल्कि पक्षी और पशु भी पानी और भोजन के लिए तरस रहे हैं, वहीं जैन मिलन महिला वीराग पोरसा और जैन मिलन बालिका मंडल पोरसा की बहनों ने जीव दया का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसने पूरे क्षेत्र का दिल जीत लिया है। संस्था के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित इस सेवा कार्यक्रम में संवेदना, समर्पण और धर्म का अद्भुत संगम देखने को मिला। बहनों ने शहर के विभिन्न स्थानों पर पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करते हुए एक दर्जन से अधिक सकोरे (मिट्टी के पात्र) टांगे, ताकि कोई भी पक्षी प्यासा न रहे।

इसके बाद सेवा की यह टोली गौशाला पहुंची, जहां गायों को रोटियां, दलिया, हरा चारा और ताजी सब्जियां खिलाकर सेवा का भाव प्रकट किया गया। सबसे भावुक क्षण तब आया जब घायल गायों के पास बैठकर णमोकार मंत्र का जाप किया गया—जिससे पूरा वातावरण भक्ति और करुणा से भर उठा। कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए वृक्षारोपण भी किया गया, जिससे समाज को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा मिली। इस आयोजन में पूर्व अध्यक्ष संगीता जैन, शीला जैन, कोषाध्यक्ष पिंकी जैन, मंत्री गीता जैन, अध्यक्ष रानी जैन सहित कई महिलाओं ने सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं बालिका मंडल की अध्यक्ष रागिनी, मंत्री स्नेहा जैन, कोषाध्यक्ष अनुष्का जैन, मुस्कान जैन, मिस्टी जैन, अंतरा जैन और मान्या जैन ने भी पूरे उत्साह के साथ भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

पक्षियों को दाना-पानी देने के लाभ (विस्तार से  जीवन रक्षा का माध्यम: गर्मी के मौसम में जल स्रोत सूख जाते हैं, ऐसे में पक्षियों को पानी उपलब्ध कराना उनके जीवन को बचाने जैसा है।  पर्यावरण संतुलन में मदद: पक्षी प्रकृति के महत्वपूर्ण अंग हैं। वे बीजों का प्रसार करते हैं और कीटों को नियंत्रित कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं। . पुण्य और मानसिक शांति: धार्मिक दृष्टि से जीवों की सेवा करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। इससे मन को सुकून और आत्मिक संतोष मिलता है।  बच्चों में संवेदना का विकास: ऐसे कार्यों से नई पीढ़ी में करुणा, जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना विकसित होती है।  जैव विविधता संरक्षण पक्षियों की संख्या बनाए रखने में यह छोटी-सी पहल भी बड़ा योगदान देती है, जिससे प्रकृति की विविधता बनी रहती है। संदेश साफ है जहां सेवा है, वहीं सच्चा धर्म है… और जहां जीव दया है, वहीं समाज की असली पहचान है।