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उत्तर प्रदेश: देश का अनोखा सूर्य मंदिर, छठ पर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का बना केंद्र 

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उत्तर प्रदेश  Published by: Anand Kumar (UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 30/07/2026 05:00:01 pm Share:
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  • Published by.: Anand Kumar (UP) ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 30/07/2026 05:00:01 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: देश में कुछ स्थान ऐसे होते हैं, जो अपने आप में रहस्य चमत्कार और अनोखी परंपराओं का संगम है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: देश में कुछ स्थान ऐसे होते हैं, जो अपने आप में रहस्य चमत्कार और अनोखी परंपराओं का संगम है। बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित सूर्य मंदिर भी ऐसा ही एक अद्भुत धाम है। जिधर सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था अटूट बनी हुई है।  यह मंदिर न केवल अपनी प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इ सकी विशेष संरचना और धार्मिक महत्व इसे देश के मंदिरों से अलग पहचान दिलाती है। त्रेता युग में इस मंदिर का इतिहास बेहद प्राचीन और गौरवशाली बताया जाता है। हर साल चैत्र और कार्तिक माह में यहां छठ महापर्व के दौरान लाखों श्रद्धालु यहां जुटते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय घाटों पर उमड़ती भीड़ इस मंदिर की लोकप्रियता का प्रमाण है।  जहां देश के अधिकांश मंदिर पूर्वाभिमुख होते हैं, वहीं देव सूर्य मंदिर पश्चिमाभिमुख हैं। यही वजह है कि यहां अस्त होते सूर्य की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जो इसे और भी खास बनाती है। 

मंदिर की स्थापत्य कला भी देखने की है। काले और भूरे पत्थरों से बना मंदिर, पत्थरों को विभिन्न आकारों में काटकर इतनी खूबसूरती से जोड़ा गया,कि यह कला का अद्भुत नमूना बन गया है। मंदिर परिसर में सूर्य देव  तीन अवस्थाओं मे विराजमान हैं- उदयाचल,मध्याचल व आलस्ताचल की प्रतिमाएं स्थापित हैं, साथ ही यहां शिव पार्वती की दुर्लभ प्रतिमा भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। करीब 100 फीट ऊंचा यह मंदिर दो मुख्य भागों में विभाजित है.गर्भगृह और मुखमंडप। गर्भगृह के ऊपर कमल के आकार का शिखर और उसे पर स्वर्ण कलश इस मंदिर की भव्यता को और बढ़ाता है। मंदिर के निर्माण को लेकर यह भी मान्यता है कि इसे भगवान विश्वकर्मा ने स्वयं बनाया था। वहीं मंदिर परिसर में लगे शिलालेख इसे बेहद प्राचीन काल का बताता है, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।