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उत्तर प्रदेश: गौतमबुद्ध नगर, डीएम की अध्यक्षता में बाढ़ समिति की बैठक, तैयारियों की हुई समीक्षा
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बाढ़ समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जनपद की भौगोलिक स्थिति के आधार पर संभावित बाढ़ परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया
विस्तार
उत्तर प्रदेश: जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बाढ़ समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए जनपद की भौगोलिक स्थिति के आधार पर संभावित बाढ़ परिस्थितियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर की जाने वाली कार्यवाही के संबंध में तत्काल प्रभाव से अपनी-अपनी विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर जिला आपदा प्रबंधन को उपलब्ध कराएं। बैठक में सिंचाई विभाग द्वारा यमुना नदी से प्रभावित होने वाले संभावित ग्रामों एवं क्षेत्रों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों सिंचाई, पशु चिकित्सा, कृषि, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, अग्निशमन, जल निगम एवं आपूर्ति विभाग की तैयारियों की समीक्षा करते हुए कहा कि सुव्यवस्थित योजना एवं समन्वित कार्यप्रणाली के माध्यम से बाढ़ जैसी आपदा के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने संबंधित प्राधिकरण के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिसूचित क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण तथा लीज पर आवंटित भूमि पर संचालित ऐसी गतिविधियां, जिनसे जनहानि की आशंका हो, धारा 10 के अंतर्गत नोटिस जारी किए जाएं। उन्होंने पुलिस विभाग के अधिकारियों से कहा कि जो भी नियम के विपरीत निर्माण कार्य कर रहा हो,उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी ने तीनों विकास प्राधिकरणों के एसीईओ की अनुपस्थिति पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने निर्देश दिए कि बाढ़ नियंत्रण हेतु पूर्वानुमान एवं चेतावनी प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए, तटबंधों का समयबद्ध निरीक्षण एवं मरम्मत सुनिश्चित की जाए, बाढ़ चौकियों की स्थापना की जाए तथा नालों की सफाई कर जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखी जाए। इसके साथ ही, राहत एवं बचाव कार्यों के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करते हुए बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने एवं आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि सभी विभाग अपने स्टाफ की ड्यूटी निर्धारित कर उनके संपर्क सूची उपलब्ध करायें। उन्होंने विद्युत विभाग का अधिकारी को निर्देश दिए कि बाढ़ को दृष्टिगत रखते हुए बाढ़ संभावित क्षेत्रों में अल्टरनेट बिजली सप्लाई की व्यवस्था रखें। जल निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ चौकियों पर जो हैंड पंप है, उनका समय रहते दुरुस्त कर लिया जाए और जहां पर नहीं है वहां नया हैंडपंप लगा दिया जाए। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय रहते सभी तैयारियां पूर्ण करने पर विशेष बल दिया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जिलाधिकारी ने कहा कि किसी विभाग के पास अगर संसाधनों की कमी है तो उसकी सूचना तत्काल उपलब्ध कराए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अतुल कुमार, उप जिलाधिकारी सदर आशुतोष गुप्ता, मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे, डिप्टी सीएमओ डॉ. टीकम सिंह, सहायक अभियंता सिंचाई विभाग प्रमोद कुमार सैनी, सहायक अभियंता आईसीडी सिंचाई विभाग पवन कुमार, सहायक श्रम आयुक्त सुयश पांडे, सहायक निदेशक कारखाना आशीष कुमार सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम (नगरीय) ललित मोहन, अधिशासी अभियंता विद्युत विभाग एक्सप्रेसवे वैभव मिश्रा, उपनिदेशक कृषि राजीव कुमार, एनडीआरएफ इंस्पेक्टर राजू यादव, जिला आपदा विशेषज्ञ ओमकार चतुर्वेदी, प्राधिकरण के अधिकारियों सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
जिलाधिकारी ने बैठक में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि डूब क्षेत्र में संचालित सरकारी एवं गैर सरकारी गौशालाओं की मैपिंग करते हुए अपनी तैयारियां पूर्ण करें। साथ ही कहा कि यह सुनिश्चित करें की सभी गौशालाओं में भूसे की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध रहे एवं बाढ़ को दृष्टिगत रखते हुए समय से ही अस्थाई गौशाला के लिए स्थान भी चिन्हित कर लिया जाये। जिला कृषि अधिकारी को निर्देश दिए कि वह भी फसलों को बाढ़ से बचाने के लिए पहले से ही अपने कार्य योजना तैयार कर लें। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ को दृष्टिगत रखते हुए रैपिड रिस्पांस टीम, मेडिकल टीम सभी बाढ़ चौकिया पर तैनात रहे एवं एंबुलेंस में दवाईयों की पर्याप्त मात्रा बनी रहे। लोक निर्माण विभाग के अधिकारीगण भी बाढ़ संभावित क्षेत्रों में भ्रमण कर सड़कों को दुरुस्त करने की कार्रवाई सुनिश्चित करें।
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