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राजस्थान: डॉटर्स डे पर बेटी वाणी के नाम पिता का भावुक संदेश, शतरंज से समाजसेवा तक बनी प्रेरणा
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: जयपुर डॉटर्स डे मेरे लिए कैलेंडर की कोई सामान्य तारीख नहीं है। यह वह अवसर है, जब एक पिता अपनी बेटी के लिए दिल में छिपी उन भावनाओं को शब्द देने की कोशिश करता है, जिन्हें शायद रोजमर्रा की जिंदगी में कहना संभव नहीं होता।
विस्तार
राजस्थान: जयपुर डॉटर्स डे मेरे लिए कैलेंडर की कोई सामान्य तारीख नहीं है। यह वह अवसर है, जब एक पिता अपनी बेटी के लिए दिल में छिपी उन भावनाओं को शब्द देने की कोशिश करता है, जिन्हें शायद रोजमर्रा की जिंदगी में कहना संभव नहीं होता। मेरी बेटी वाणी जैन मेरे लिए सिर्फ मेरी बेटी नहीं, बल्कि मेरी प्रेरणा, मेरा विश्वास और मेरे जीवन का ऐसा खूबसूरत अध्याय है, जिसे मैं हर दिन गर्व के साथ जीता हूं। वाणी की उम्र भले ही अभी छोटी है, लेकिन उसकी सोच और दूसरों को साथ लेकर चलने का उसका नजरिया मुझे लगातार प्रभावित करता है। करीब एक दशक से शतरंज से जुड़ी वाणी ने इस खेल से केवल चालें चलना नहीं सीखा, बल्कि धैर्य, अनुशासन, निर्णय लेने, हार से सीखने और लक्ष्य के लिए लगातार प्रयास करने का संस्कार सीखा है। लेकिन एक पिता के रूप में मेरी सबसे बड़ी खुशी उसकी शतरंज की उपलब्धियां नहीं हैं। मुझे सबसे अधिक गर्व तब होता है, जब मैं देखता हूं कि वाणी अपनी खुशी और अपनी प्रतिभा को केवल अपने तक सीमित नहीं रखना चाहती।
इतनी छोटी उम्र में दूसरे बच्चों को साथ लेकर चलना, उन्हें सीखने और आगे बढ़ने के अवसर देना और अपनी क्षमता के अनुसार समाज के लिए कुछ करने की सोच रखना मेरे लिए वाणी की सबसे बड़ी उपलब्धि है। हाल ही में वाणी ने बच्चों के लिए ‘हनुमान अंश’ फिल्म का विशेष फैमिली शो आयोजित करने की पहल की। उद्देश्य केवल बच्चों को फिल्म दिखाना नहीं था, बल्कि उन्हें परिवार, संस्कार, भारतीय संस्कृति और अच्छे मूल्यों से जोड़ने का एक प्रयास था। आज जब बच्चों के मनोरंजन के विकल्प बहुत हैं, ऐसे समय में मनोरंजन के साथ संस्कार और परिवार के महत्व को जोड़ने की यह सोच अपने आप में विशेष है।
मेरे लिए यह सिर्फ एक फिल्म दिखाने का कार्यक्रम नहीं था। यह वाणी की सोच का एक छोटा-सा उदाहरण था कि खुशी अकेले मनाने के बजाय उसे दूसरों के साथ बांटा जाए। बच्चों और उनके माता-पिता को साथ लाकर एक अच्छा पारिवारिक अनुभव देने का उसका प्रयास मुझे भीतर तक छू गया। वाणी की यही सोच धीरे-धीरे एक मिसाल का रूप ले रही है। कभी शतरंज के माध्यम से बच्चों को जोड़ना, कभी प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देना और कभी परिवार एवं संस्कारों से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के साथ सकारात्मक समय बिताना इन छोटी-छोटी पहलों में मुझे एक बड़ी सोच दिखाई देती है। एक पिता के रूप में मैं वाणी से हमेशा यही कहता हूं कि सफलता केवल यह नहीं है कि लोग तुम्हें पहचानें; असली सफलता यह है कि तुम्हारे कारण किसी और को आगे बढ़ने का अवसर मिले।
मेरा मानना है कि बेटियों को केवल पढ़ाना और आगे बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की स्वतंत्रता, अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर और समाज के लिए कुछ करने का विश्वास भी देना चाहिए। जब बेटी को परिवार का भरोसा मिलता है तो उसकी सोच केवल अपने भविष्य तक सीमित नहीं रहती, वह दूसरों के भविष्य के बारे में भी सोचने लगती है। वाणी ने मुझे पिता होने का एक नया अर्थ समझाया है। उसकी हर छोटी पहल मुझे यह एहसास कराती है कि बच्चों में केवल प्रतियोगिता की भावना पैदा करना जरूरी नहीं, बल्कि उनमें सहयोग, संवेदनशीलता, संस्कार और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना पैदा करना भी उतना ही जरूरी है। मैं नहीं चाहता कि वाणी केवल बड़ी होकर एक सफल व्यक्ति बने। मेरी सबसे बड़ी इच्छा है कि वह एक अच्छी इंसान बने ऐसी इंसान, जिसके आगे बढ़ने से उसके साथ चलने वाले लोग भी आगे बढ़ें।
वाणी, तुम्हारी उम्र छोटी है, लेकिन तुम्हारे सपने बड़े हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि तुम्हारी खुशी में दूसरों की खुशी भी शामिल है। यही गुण तुम्हें मेरे लिए खास बनाता है।
तुम्हारी हर मुस्कान मेरी खुशी है, तुम्हारा आत्मविश्वास मेरा गर्व है और तुम्हारे सपने मेरी उम्मीद हैं। जिंदगी में कितनी भी ऊंचाई हासिल करो, लेकिन अपने संस्कार, अपनी विनम्रता और दूसरों को साथ लेकर चलने की भावना को हमेशा अपने साथ रखना।
डॉटर्स डे पर मैं सिर्फ अपनी बेटी को शुभकामनाएं नहीं दे रहा, बल्कि उसके उस सोच को सलाम कर रहा हूं, जो इतनी छोटी उम्र में उसे अपने साथ-साथ दूसरों के लिए भी सोचने की प्रेरणा देती है।
