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उत्तर प्रदेश: बृजेश गंझू मुठभेड़ पर टीपीसी ने उठाए सवाल, सात जिलों में तीन दिवसीय बंद का आह्वान
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीया सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) सुप्रीमो और झारखंड राज्य के मोस्टवांटेड नक्सली बृजेश गंझू उर्फ़ गोपाल सिंह भोक्ता की वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ मे 20 सितंबर को मौत हो गई थी।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीया सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) सुप्रीमो और झारखंड राज्य के मोस्टवांटेड नक्सली बृजेश गंझू उर्फ़ गोपाल सिंह भोक्ता की वाराणसी में यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ मे 20 सितंबर को मौत हो गई थी। मौत के बाद प्रतिबंधित नक्सली संगठन टीपीसी ने विरोध का ऐलान किया है। संगठन ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए 24 से 26 सितंबर तक झारखंड के सात जिलों में बंद का आह्वान किया है। हालांकि, संगठन की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। टीपीसी की लोहरदगा, लातेहार,महुआडांड़, गारु सीमा, गुमला और पलामू सीमांत जोनल कमेटी की ओर से जारी बयान में चतरा, हजारीबाग, पलामू, लातेहार,गढ़वा, लोहरदगा, और गुमला में बंद की घोषणा की गई है। यह बयान जोनल कमांडर नथुनी के नाम से जारी किया गया है। संगठन ने अपने बयान में बृजेश गंझू की मुठभेड़ में मौत को लेकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं और इसे फर्जी मुठभेड़ बताया है। इसी के विरोध में तीन दिनों तक बंद रखने का आह्वान किया गया है। टीपीसी ने अपने बयान में दावा किया है कि 10 सितंबर को बृजेश गंझू की संगठन के रीजनल कमांडर शशिकांत और जोनल कमांडर नथुनी से बातचीत हुई थी। इसके बाद संगठन का आरोप है कि 16 सितंबर को पुलिस ने केरेडारी के जंगल से बृजेश गंझू को पकड़ लिया था। बयान में दावा किया गया है कि संगठन की ओर से काफी तलाश किए जाने के बावजूद बृजेश का कोई पता नहीं चला। इसके बाद 20 सितंबर को वाराणसी में उसकी हत्या कर दी गई। टीपीसी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की है. हालांकि, संगठन के इन दांवों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बंद के आह्वान को देखते हुए झारखंड पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। प्रभावित जिलों के संवेदनशील इलाकों के साथ-साथ रेल लाइनों, कोयला क्षेत्रों और प्रमुख राजमार्गों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। वरीय पुलिस अधिकारियों ने लोगों से सामान्य रूप से अपनी दैनिक कार्य करने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि बंद के आह्वान का आम जनजीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने दिया जाएगा। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है और किसी भी स्थिति में निपटने के लिए पुलिस पूरी तरह सतर्क है।
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