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उत्तर प्रदेश: एआई ने पकड़ा आयुष्मान भारत योजना में 655 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा, सैकड़ों अस्पतालों पर हुई कार्रवाई
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पतालों द्वारा कथित रूप से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर किए जा रहे बीमा क्लेम के बड़े खेल का खुलासा हुआ है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत अस्पतालों द्वारा कथित रूप से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट और दस्तावेजों के आधार पर किए जा रहे बीमा क्लेम के बड़े खेल का खुलासा हुआ है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग आधारित तकनीकों की मदद से 655.04 करोड़ रुपये के फर्जी क्लेम का पता लगाया है। जांच में सामने आया कि कई अस्पतालों ने एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी रिपोर्टों में हेरफेर कर अलग-अलग मरीजों के नाम से क्लेम दाखिल किए। कुछ मामलों में एक ही मेडिकल दस्तावेज का इस्तेमाल कई मरीजों और विभिन्न अस्पतालों में किया गया, जबकि कई रिपोर्टों में मरीज की जानकारी और तिथि बदलकर दोबारा प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुसार, अनियमितताओं में संलिप्त पाए जाने पर 2021 अस्पतालों को डिइम्पैनल्ड किया गया है, जबकि 590 अस्पतालों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा 26 अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। सरकार ने संबंधित अस्पतालों पर 263.71 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है। एआई आधारित इमेज एनालिटिक्स सिस्टम ने ऐसे कई मामलों का पता लगाया, जिनमें एक ही एक्स-रे फिल्म का इस्तेमाल तीन अलग-अलग मरीजों के क्लेम में किया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि केवल मरीज का नाम, पहचान संख्या और तारीख बदलकर दस्तावेजों को दोबारा प्रस्तुत किया गया था। सिस्टम ने इसे संभावित इमेज टैम्परिंग के रूप में चिन्हित किया। मशीन लर्निंग आधारित विश्लेषण के दौरान घुटना प्रत्यारोपण से जुड़े मामलों में एक ही इम्प्लांट बारकोड और विवरण का उपयोग अलग-अलग अस्पतालों के क्लेम में पाया गया। इससे इलाज और बिलिंग रिकॉर्ड में हेरफेर की आशंका सामने आई। वहीं सोशल नेटवर्क एनालिसिस के जरिए ऐसे संदिग्ध नेटवर्क भी चिन्हित किए गए, जिनमें एक ही यूजर के माध्यम से 20 से अधिक लाभार्थी कार्ड बनाए गए और सभी मरीजों को एक ही दिन एक ही अस्पताल में भर्ती कर उसी दिन एंजियोप्लास्टी किए जाने का दावा किया गया। इसके अलावा ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) और डीप लर्निंग तकनीक की मदद से लैब रिपोर्टों की जांच में ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें रक्त की श्वेत रक्त कोशिकाओं की संख्या सामान्य होने के बावजूद गंभीर संक्रमण दर्शाकर अधिक राशि का क्लेम किया गया था। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण का कहना है कि एआई आधारित निगरानी प्रणाली के माध्यम से स्वास्थ्य योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और फर्जीवाड़े पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार कार्रवाई जारी रहेगी।
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