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उत्तर प्रदेश: भू-जल दोहन और जल प्रदूषण के खिलाफ भारतीय किसान संगठन का प्रदर्शन, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन
- Photo by : SOCIAL MEDIA
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: अध्यक्ष दीपू यादव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उठाया अवैध कपड़ा रंगाई फैक्ट्रियों और बिल्डरों द्वारा भू-जल दोहन का मुद्दा। रसायन युक्त जहरीले पानी से पीने योग्य नहीं बचा भूमिगत जल; नोएडा के 'डार्क ज़ोन' बनने की जताई आशंका।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: अध्यक्ष दीपू यादव के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उठाया अवैध कपड़ा रंगाई फैक्ट्रियों और बिल्डरों द्वारा भू-जल दोहन का मुद्दा। रसायन युक्त जहरीले पानी से पीने योग्य नहीं बचा भूमिगत जल; नोएडा के 'डार्क ज़ोन' बनने की जताई आशंका। अवैध फैक्ट्रियों की सीलिंग, एफआईआर तथा बिल्डर साइटों पर एसटीपी पानी के अनिवार्य उपयोग की मांग। मांगें पूरी न होने पर संगठन ने दी पूरे जनपद में बड़े जन-आंदोलन की चेतावनी। जनपद गौतम बुद्ध नगर में तेज़ी से गिर रहे भू-जल स्तर, अवैध बोरिंग और कपड़ा रंगाई की अवैध फैक्ट्रियों द्वारा फैलाए जा रहे भयंकर जल प्रदूषण के खिलाफ भारतीय किसान संगठन ने कड़ा रुख अपनाया है। आज संगठन के नोएडा महानगर अध्यक्ष दीपू यादव के नेतृत्व में किसान प्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट नोएडा को उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसके कारण आसपास का भूमिगत जल इतना दूषित हो गया है कि वह पीने तो क्या, नहाने या कपड़े धोने के लायक भी नहीं बचा है। ज्ञापन में की गई मुख्य मांगें: आंदोलन की चेतावनी महानगर अध्यक्ष दीपू यादव ने कहा कि यदि स्थानीय प्रशासन और शासन ने इस गंभीर व संवेदनशील जनसमस्या पर तुरंत कड़े कदम नहीं उठाए, तो नोएडा जैसा विश्वस्तरीय औद्योगिक शहर बहुत जल्द पानी की बूंद-बूंद को तरसेगा और 'डार्क ज़ोन' में तब्दील हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो भारतीय किसान संगठन जन-जागरूकता अभियान चलाकर पूरे गौतम बुद्ध नगर में व्यापक स्तर पर बड़ा आंदोलन करने को विवश होगा, जिसकी पूरी जवाबदेही शासन व प्रशासन की होगी। इस मौके पर अशोक यादव ऋषिपाल शर्मा, अजब सिंह चौहान हरेन्द्र यादव, भूपेन्द्र यादव, प्रदीप यादव, विष्णु तिवारी भानु कुमार आदि पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मुख्य रूप से मौजूद रहे।
ज्ञापन के माध्यम से महानगर अध्यक्ष दीपू यादव ने अवगत कराया कि सम्पूर्ण गौतम बुद्ध नगर में बिल्डरों की बड़ी-बड़ी व्यावसायिक व आवासीय निर्माण परियोजनाओं तथा नोएडा के ग्रामीण क्षेत्रों में खाली पड़े प्लॉटों में धड़ल्ले से अवैध कपड़ा रंगाई की फैक्ट्रियां चलाई जा रही हैं। ये इकाइयां न केवल दिन-रात बेरोक-टोक भू-जल का दोहन कर रही हैं, बल्कि रसायनों से युक्त जहरीला पानी बिना किसी उपचार के सीधे जमीन में बहा रही हैं।
अवैध रंगाई फैक्ट्रियों पर सीलिंग व एफआईआर: ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में चल रही अवैध कपड़ा रंगाई फैक्ट्रियों को तत्काल सील कर उनके संचालकों पर कड़े पर्यावरण नियमों के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर भारी जुर्माना लगाया जाए। बिल्डर प्रोजेक्ट्स पर सख्ती: निर्माणाधीन बिल्डर साइटों पर हो रहे भू-जल निष्कासन की निष्पक्ष जांच की जाए और उन्हें निर्माण कार्यों के लिए केवल एसटीपी (STP) के ट्रीटेड वॉटर का प्रयोग करने हेतु बाध्य किया जाए। कमर्शियल सबमर्सिबल पर रोक: बिना प्रशासनिक अनुमति के व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए चलाए जा रहे सबमर्सिबल और बोरवेल पर तत्काल कानूनी प्रतिबंध लगाया जाए। वाटर हार्वेस्टिंग की जांच: जिले में गिरते जलस्तर को बचाने के लिए सभी सोसायटियों और बड़े संस्थानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्य तकनीकी जांच कराई जाए।
