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उत्तर प्रदेश: आयुष्मान योजना के कथित फर्जीवाड़े में बड़ा मोड़, शिकायतकर्ता रिटायर्ड शिक्षक समेत परिवार के 5 पर FIR

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उत्तर प्रदेश  Published by: Raju(UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Yashoda, Date: 26/09/2026 12:13:37 pm Share:
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  • Edited By.: Yashoda,
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  • 26/09/2026 12:13:37 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बरेली आयुष्मान भारत योजना में कथित फर्जीवाड़े की शिकायत उस समय नया मोड़ ले गई, जब जिस रिटायर्ड शिक्षक ने अपने दामाद पर आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज का क्लेम हड़पने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी, जांच के बाद उन्हीं समेत परिवार के पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बरेली आयुष्मान भारत योजना में कथित फर्जीवाड़े की शिकायत उस समय नया मोड़ ले गई, जब जिस रिटायर्ड शिक्षक ने अपने दामाद पर आयुष्मान कार्ड के जरिए इलाज का क्लेम हड़पने का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी, जांच के बाद उन्हीं समेत परिवार के पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर कोतवाली पुलिस ने आयुष्मान योजना में कूटरचित दस्तावेजों के जरिए अनुचित लाभ लेने के आरोप में कार्रवाई की है गुलिस्तां कॉलोनी, जगतपुर निवासी रिटायर्ड शिक्षक बाबू अंसारी ने 20 अगस्त को जिलाधिकारी से शिकायत की थी। उन्होंने बताया था कि वर्ष 2024 में उन्होंने आफताब आई केयर में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था। इलाज के करीब 15 हजार रुपये उन्होंने खुद खर्च किए। पत्नी के इलाज का खर्च भी परिवार ने अपनी ओर से उठाने का दावा किया। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि उनके और पत्नी के इलाज के नाम पर आयुष्मान भारत योजना से भी क्लेम लिया गया है। इसके बाद उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की थी।


दामाद पर लगाया था शक, जांच में शिकायतकर्ता परिवार ही घेरे में बाबू अंसारी ने शिकायत में अपने दामाद जावेद अख्तर अंसारी पर आयुष्मान योजना के क्लेम में गड़बड़ी का शक जताया था। उनका कहना था कि इलाज की व्यवस्था दामाद ने कराई थी और रिश्तेदारी के भरोसे उन्होंने इलाज से संबंधित बिल और अन्य दस्तावेज नहीं मांगे थे। बाद में आयुष्मान योजना से क्लेम होने की जानकारी मिलने पर उन्हें संदेह हुआ। मामला जिलाधिकारी के सामने पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई। इससे पहले 18 अगस्त को दूसरे पक्ष की ओर से भी शिकायत की गई थी। दोनों शिकायतों को देखते हुए 21 अगस्त को संयुक्त जांच टीम गठित की गई। टीम ने आयुष्मान कार्ड, इलाज से जुड़े दस्तावेज, अस्पताल के रिकॉर्ड और क्लेम संबंधी अभिलेखों की पड़ताल की। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद मामले की दिशा ही बदल गई रिटायर्ड शिक्षक, सिपाही बेटा और होमगार्ड बहू समेत पांच नामजद जिला शिकायत निवारण अधिकारी अमीर बेग की ओर से कोतवाली पुलिस को भेजे गए पत्र के आधार पर बाबू अंसारी, उनकी पत्नी नसरीन बेगम, बेटे मोहम्मद जावेद अंसारी, मोहम्मद जहाजेब अंसारी और बहू नेहा रानी को नामजद किया गया है।
बताया गया है कि मोहम्मद जावेद अंसारी पुलिस में सिपाही हैं और डायल-112 से जुड़े हैं, जबकि उनकी पत्नी नेहा रानी होमगार्ड हैं। जांच के आधार पर आरोप लगाया गया है कि आयुष्मान भारत योजना में कूटरचित दस्तावेजों के माध्यम से अनुचित लाभ लिया गया।


कार्ड से क्लेम तक किस-किस की भूमिका? जांच में खुलेगा राज मामले में अब पुलिस की विवेचना कई अहम सवालों के इर्द-गिर्द घूमेगी। आयुष्मान कार्ड कब और किस प्रक्रिया से तैयार हुए? इलाज के दौरान उनका इस्तेमाल किसने किया? अस्पताल की ओर से कितनी राशि का क्लेम प्रस्तुत किया गया? सरकारी योजना से भुगतान किस खाते या माध्यम से हुआ? और कार्ड बनवाने से लेकर क्लेम हासिल करने तक पूरी प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे? जांच में यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके नाम भी मुकदमे में शामिल किए जा सकते हैं। ऐसे में फिलहाल पांच नामजद आरोपियों से शुरू हुई कार्रवाई आगे और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दामाद पर धमकी और समझौते के दबाव के आरोप भी लगाए थे बाबू अंसारी ने अपनी मूल शिकायत में दामाद पर परिवार को मुकदमों में फंसाने और समझौते के लिए दबाव बनाने के आरोप भी लगाए थे।


 उन्होंने पूर्व में एक शिकायत में 1.30 लाख रुपये लेकर समझौता होने और शपथपत्र दिए जाने का दावा भी किया था। हालांकि, अब आयुष्मान योजना से जुड़ी जांच में खुद शिकायतकर्ता और उनके परिवार के पांच सदस्यों के नाम एफआईआर में आने से मामला पूरी तरह पलट गया है। फिलहाल पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है। अब जांच का फोकस इस बात पर रहेगा कि आयुष्मान योजना के सरकारी लाभ का वास्तविक लाभार्थी कौन था और कथित फर्जीवाड़े की पूरी कड़ी में अस्पताल, कार्ड और क्लेम प्रक्रिया से जुड़े किन लोगों की भूमिका रही। 


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