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उत्तर प्रदेश: गाजीपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस अभियान शुरू, 17 लाख बच्चों को खिलाई जाएगी एल्बेंडाजोल

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उत्तर प्रदेश  Published by: Ramkesh Vishwakarma , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 11/08/2026 10:45:25 am Share:
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  • Published by.: Ramkesh Vishwakarma ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 11/08/2026 10:45:25 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर सोमवार को जिले में बच्चों और किशोरों को पेट के कीड़ों से बचाने के लिए विशेष अभियान की शुरुआत की गई।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर सोमवार को जिले में बच्चों और किशोरों को पेट के कीड़ों से बचाने के लिए विशेष अभियान की शुरुआत की गई। प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ. एम.के. सिंह ने माउंट लिटेरा जी स्कूल में बच्चों को एल्बेंडाजोल की दवा खिलाकर अभियान का शुभारंभ किया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिले में करीब 17 लाख बच्चों और किशोरों को कृमि मुक्ति की दवा खिलाने का लक्ष्य रखा गया है। एसीएमओ डॉ. एम.के. सिंह ने बताया कि अभियान के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों, स्वास्थ्य केंद्रों, पंजीकृत स्कूलों के साथ-साथ ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले श्रमिकों और घुमंतू लोगों के बच्चों को भी दवा खिलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जो बच्चे किसी कारणवश अभियान के निर्धारित दिन दवा नहीं खा पाएंगे, उन्हें 14 अगस्त को मॉपअप राउंड के दौरान दवा खिलाई जाएगी।

उन्होंने बताया कि एक से दो वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल की आधी गोली दी जाएगी, जबकि दो से 19 वर्ष तक के बच्चों और किशोरों को पूरी गोली खिलाई जानी है। छोटे बच्चों को दवा पीसकर देने और बड़े बच्चों को गोली चबाकर खाने की सलाह दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एल्बेंडाजोल की दवा खाली पेट नहीं खिलानी चाहिए। एसीएमओ ने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को निर्धारित अभियान के दौरान कृमि मुक्ति की दवा जरूर खिलवाएं। उन्होंने कहा कि बच्चे अक्सर जमीन से वस्तुएं उठाकर मुंह में डाल लेते हैं या नंगे पैर घूमते हैं, जिससे उनके शरीर में कृमि संक्रमण होने का खतरा रहता है। पेट में मौजूद कृमि बच्चे के भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों का उपयोग कर लेते हैं, जिससे बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है तथा कमजोरी और एनीमिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

उन्होंने बताया कि कृमि संक्रमण से बचाव के लिए समय-समय पर कृमि मुक्ति की दवा देना जरूरी है। दवा लेने के बाद कुछ बच्चों में हल्का चक्कर, घबराहट, सिरदर्द, दस्त, पेट दर्द, कमजोरी, मितली या उल्टी जैसे हल्के प्रभाव दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मदद लेने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सक से संपर्क करने की सलाह दी गई। कार्यक्रम में जिला मलेरिया अधिकारी मनोज कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक प्रभुनाथ, जिला सामुदायिक प्रबंधक अनिल वर्मा, अर्बन हेल्थ कोऑर्डिनेटर अशोक कुमार और एविडेंस एक्शन के संतोष कुमार सिंह मौजूद रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेश के. ने की। स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को सफल बनाने के लिए अभिभावकों और संबंधित संस्थानों से सहयोग की अपील की है।