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उत्तर प्रदेश: बिगड़ती हवा पर उठे सवाल, नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर जनता नाराज
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: देवबंद कहने को तो देवबंद को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से एक विशेष स्थान प्राप्त है, लेकिन आज यहाँ की आबोहवा (हवा की गुणवत्ता) जिस बदहाली के दौर से गुजर रही है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: देवबंद कहने को तो देवबंद को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से एक विशेष स्थान प्राप्त है, लेकिन आज यहाँ की आबोहवा (हवा की गुणवत्ता) जिस बदहाली के दौर से गुजर रही है। उसने स्थानीय प्रशासन के दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं। देवबंद नगर और इसके आस-पास के क्षेत्र में लगातार बिगड़ता एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) इस बात का सीधा प्रमाण है कि नगर पालिका परिषद का सफ़ाई विभाग पूरी तरह से पंगु हो चुका है हालत यह हो चुकी है कि आज देवबंद के नागरिकों के पास शुद्ध हवा में सांस लेने जैसा बुनियादी और संवैधानिक अधिकार भी नहीं बचा है। सवाल य़ह है क्या देवबंद नगर पालिका परिषद ने नगर वासियों को तिल-तिल मरने के लिए लावारिस छोड़ दिया है? क्या इस ऐतिहासिक नगरी के नागरिकों के पास अब जीने और सांस लेने जैसा बुनियादी संवैधानिक अधिकार भी नहीं बचा है? ये वो कड़वे और सुलगते सवाल हैं, जो आज देवबंद की फिजाओं में तैर रहे हैं। सच तो यह है कि नगर पालिका के सफ़ाई विभाग की चरमरा चुकी व्यवस्था और शीर्ष नेतृत्व की घोर लापरवाही ने देवबंद को एक गैस चैंबर में तब्दील कर दिया है। यहाँ जनता टैक्स तो शुद्ध हवा और सफ़ाई का दे रही है लेकिन बदले में उसे मिल रही है सिर्फ फेफड़ों को छलनी करने वाली जहरीली हवा। हवा की शुद्धता को मापने वाले ग्लोबल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म AQI.in और AccuWeather के हालिया आंकड़े नगर पालिका के सफ़ाई दावों के मुंह पर करारा तमाचा हैं। बीती तारीखों में देवबंद और आस-पास के इलाके का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) जिस रफ्तार से बढ़ा है। उसने डॉक्टरों और पर्यावरणविदों के होश उड़ा दिए हैं। 18 मई AQI का स्तर 165 (खराब श्रेणी) पर था जहाँ सामान्य लोगों को भी सांस लेने में भारीपन महसूस होने लगा 19 मई स्थिति और बिगड़ी, आंकड़ा 138 से ऊपर (अस्वस्थ श्रेणी) दर्ज किया गया 20-21 मई घनी आबादी और मुख्य रास्तों पर प्रदूषण का तांडव देखा गया, जहाँ कुछ जगहों पर यह 216 AQI (बेहद अस्वस्थ और खतरनाक श्रेणी) तक जा पहुँचा AccuWeather के अनुसार, हवा में खतरनाक PM2.5 और PM10 के कणों की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सुरक्षित दायरे को कई गुना पार कर चुकी है यह साफ दर्शाता है कि देवबंद की हवा अब सांस लेने लायक नहीं बल्कि बीमारियां बांटने का जरिया बन चुकी है। नगर पालिका का सफ़ाई एवं स्वास्थ्य विभाग आज शहर के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। सड़कों के किनारे महीनों से जमा धूल, गाद और कचरे को हटाने की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जब इस धूल पर भारी वाहन गुजरते हैं, तो पूरा शहर धूल के गुबार में समा जाता है हद तो तब हो जाती है, जब अपनी नाकामी को छुपाने के लिए सफ़ाई विभाग के कर्मचारी या स्थानीय तत्व कूड़े के ढेरों में सरेआम आग लगा देते हैं। इस सुलगते हुए प्लास्टिक और कचरे से निकलने वाला डायोक्सिन और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसा जहरीला धुआं सीधे तौर पर बच्चों और बुजुर्गों को अस्थमा और दिल की बीमारियों की तरफ धकेल रहा है क्या यह प्रशासनिक हत्या का प्रयास नहीं है? जनता का सबसे बड़ा आक्रोश नगर पालिका अध्यक्ष विपिन गर्ग और उनके उन चहेते व करीबी सभासदों के खिलाफ है जो मलाईदार विभागों और ठेकों के बंटवारे में तो सबसे आगे रहते हैं, लेकिन जब जनता के हक की बात आती है तो फेविकोल लगाकर बैठ जाते हैं सत्ता और रसूख के नशे में चूर इस सिंडिकेट से आज देवबंद का एक-एक नागरिक और युवा आंख में आंख डालकर हिसाब मांग रहा है। माननीय अध्यक्ष विपिन गर्ग जी बीते 3 सालों में देवबंद की आबोहवा सुधारने के लिए आपकी पालिका ने कौन सा तीर मारा है? जनता को श्वेत पत्र जारी कर हिसाब दीजिए! सड़कों से धूल हटाने के लिए जो बड़े-बड़े वादे और बजट पास हुए, वो किसकी जेबों में गए? मैकेनिकल स्वीपिंग मशीनें और पानी का छिड़काव सिर्फ कागजी फाइलों में क्यों घूम रहा है? क्या पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाने की खुली छूट इन करीबियों को आपके संरक्षण में मिली हुई है?
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