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उत्तर प्रदेश: यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर के विरोध में व्यापार मंडल ने भेजा ज्ञापन

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad Ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shikha Pandey, Date: 23/09/2026 12:16:20 pm Share:
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  • Published by.: Irshad Ahmad ,
  • Edited By.: Shikha Pandey,
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  • 23/09/2026 12:16:20 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बस्ती यूपीआई के चुनिंदा व्यापारी भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में बस्ती उद्योग व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बस्ती यूपीआई के चुनिंदा व्यापारी भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के विरोध में बस्ती उद्योग व्यापार मंडल ने प्रधानमंत्री के नाम जिलाधिकारी के माध्यम से ज्ञापन भेजा। व्यापारियों ने शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और छोटे कारोबारियों को राहत देने की मांग की। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने कहा कि यूपीआई छोटे कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। व्यापारियों का कहना है कि बड़े मूल्य के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लागू होने से कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर कम मार्जिन वाले कारोबार पर पड़ सकता है। केंद्र सरकार की घोषित व्यवस्था के अनुसार ₹2,000 से अधिक के निर्धारित P2M यानी व्यक्ति से व्यापारी को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के लेन-देन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति लेन-देन तक सीमित रहेगा। वहीं P2P यानी व्यक्ति से व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं होगा। छोटे व्यापारियों के लिए निर्धारित शून्य-एमडीआर व्यवस्था भी जारी रहेगी।

सरकार के अनुसार एमडीआर ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाएगा। यह व्यापारी भुगतान व्यवस्था के भीतर भुगतान प्रणाली से जुड़े भागीदारों के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। व्यापार मंडल ने हालांकि कहा कि इसका खर्च व्यापारी स्तर पर आने से छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ सकता है। ज्ञापन देने वालों में जिलाध्यक्ष सुनील कुमार गुप्ता, चेयरमैन आनंद राजपाल, संयोजक सूर्य कुमार शुक्ल, महामंत्री रंजीत श्रीवास्तव, नगर अध्यक्ष प्रभात सोनी समेत बड़ी संख्या में व्यापारी शामिल रहे। व्यापार मंडल ने मांग की कि छोटे कारोबारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शुल्क व्यवस्था की समीक्षा की जाए, ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने की प्रक्रिया प्रभावित न हो।


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