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उत्तर प्रदेश: कॉस्मेटिक्स, साबुन और टूथपेस्ट पर भी लगेगा 'वेज-नॉनवेज' का मार्क, विधिक माप विज्ञान के नए नियम लागू

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उत्तर प्रदेश  Published by: Chhatra Pal , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 24/09/2026 10:42:04 am Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 24/09/2026 10:42:04 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार के विधिक माप विज्ञान (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमों में किए गए नए संशोधन का असर बरेली के बाजार में बिकने वाले साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और अन्य प्रसाधन सामग्री पर भी पड़ेगा। 2

विस्तार

उत्तर प्रदेश: केंद्र सरकार के विधिक माप विज्ञान (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियमों में किए गए नए संशोधन का असर बरेली के बाजार में बिकने वाले साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट, कॉस्मेटिक्स और अन्य प्रसाधन सामग्री पर भी पड़ेगा। 21 सितंबर 2026 से प्रभावी संशोधन के तहत संबंधित उत्पादों के मुख्य प्रदर्शन पैनल पर उनके शाकाहारी या मांसाहारी मूल की पहचान के लिए निर्धारित रंग की बिंदी प्रदर्शित करने का प्रावधान किया गया है। पैकेट देखकर पहचान सकेंगे उपभोक्ता नए प्रावधान के अनुसार मांसाहारी मूल के उत्पादों के लिए लाल या भूरे रंग की बिंदी और शाकाहारी मूल के उत्पादों के लिए हरे रंग की बिंदी मुख्य डिस्प्ले पैनल के शीर्ष पर प्रदर्शित करनी होगी। इससे बरेली के उपभोक्ताओं को उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर ही उसकी निर्धारित श्रेणी की पहचान करने में मदद मिलेगी। खासकर कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज जैसे उत्पादों में यह जानकारी अब पैकेजिंग का हिस्सा होगी।

कंपनियों को पैकेजिंग में करना होगा बदलाव बरेली में विभिन्न कंपनियों के उत्पाद थोक विक्रेताओं और खुदरा दुकानों के जरिए बाजार में पहुंचते हैं। नए नियम का सबसे प्रत्यक्ष असर उत्पाद निर्माताओं और पैकेजिंग व्यवस्था पर पड़ेगा। कंपनियों को नए लेबलिंग प्रावधान के अनुरूप पैकेज तैयार करने होंगे। इसके चलते आने वाले समय में बाजार में पुरानी और संशोधित पैकेजिंग वाले उत्पाद एक साथ दिखाई दे सकते हैं। थोक बाजार से खुदरा दुकानों तक निगरानी की चुनौती बरेली में बड़ा खुदरा बाजार होने के कारण नियम के अनुपालन की जिम्मेदारी केवल निर्माता तक सीमित नहीं रहेगी। बाजार में आने वाले पैकेज्ड उत्पादों की जांच और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को निगरानी करनी होगी। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित रंग की बिंदी सही स्थान और निर्धारित तरीके से प्रदर्शित की जा रही है या नहीं।


पुराने स्टॉक को लेकर उठेगा सवाल संशोधन के तत्काल प्रभावी होने के बाद एक व्यावहारिक सवाल पुराने स्टॉक को लेकर भी रहेगा। दुकानदारों के पास पहले से मौजूद साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक उत्पाद पुराने पैकेज में हो सकते हैं। ऐसे में स्थानीय व्यापारियों के बीच यह स्पष्टता जरूरी होगी कि पुराने पैकेज वाले स्टॉक की बिक्री को लेकर विभागीय दिशा-निर्देश क्या हैं और नए पैकेज पर नियमों का पालन किस चरण से अनिवार्य माना जाएगा। बरेली में जांच का दायरा बढ़ने की संभावना नियम लागू होने के बाद विधिक माप विज्ञान विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विभाग को बाजार में उपलब्ध पैकेज्ड कॉस्मेटिक्स और टॉयलेटरीज के नमूने लेकर लेबलिंग की जांच करनी पड़ सकती है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इससे बरेली के बाजार में पैकेजिंग संबंधी अनुपालन जांच का एक नया बिंदु जुड़ जाएगा।

उपभोक्ता के लिए जानकारी, कारोबारियों के लिए अनुपालन नए बदलाव का असर दो स्तरों पर देखा जाएगा। उपभोक्ता को उत्पाद की निर्धारित श्रेणी की जानकारी पैकेट पर स्पष्ट रूप से मिलेगी, जबकि निर्माता और कारोबारी प्रतिष्ठानों को संशोधित लेबलिंग व्यवस्था का पालन सुनिश्चित करना होगा। बरेली में इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि बाजार में नए नियम को लेकर व्यापारियों और कंपनियों को कितनी स्पष्ट जानकारी दी जाती है और विभागीय स्तर पर अनुपालन की कितनी नियमित जांच होती है। वरिष्ठ निरीक्षक मुकुल रंजन उपाध्याय, बांट-माप ने बताया कि हरा चिह्न शाकाहारी और लाल चिह्न मांसाहारी उत्पाद की पहचान है। गड़बड़ी मिलने पर ग्राहक पैकेट की तस्वीर सहित शिकायत करें। विभाग शिकायत पर पैकेट व लेबल की जांच कर उल्लंघन की पुष्टि करेगा, फिर संबंधित निर्माता या विक्रेता को नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश देगा। नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।


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