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उत्तराखंड: गंगोलीहाट में एससी-एसटी शिक्षक एसोसिएशन का 19 सूत्रीय मांगपत्र, मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा
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संक्षेप
उत्तराखंड: अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक एसोसिएशन (उत्तराखंड) की ब्लॉक कार्यकारिणी गंगोलीहाट द्वारा क्षेत्र के अनुसूचित जाति और जनजाति समाज, शिक्षक-कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा सामाजिक न्याय से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी गंगोलीहाट के माध्यम से सौंपा गया।
विस्तार
उत्तराखंड: अनुसूचित जाति-जनजाति शिक्षक एसोसिएशन (उत्तराखंड) की ब्लॉक कार्यकारिणी गंगोलीहाट द्वारा क्षेत्र के अनुसूचित जाति और जनजाति समाज, शिक्षक-कर्मचारियों, विद्यार्थियों तथा सामाजिक न्याय से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी गंगोलीहाट के माध्यम से सौंपा गया। एसोसिएशन ने सरकार के समक्ष दृढ़ता से अपनी 19 सूत्रीय मांगें रखी हैं और चेतावनी दी है कि यदि इन पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीकों से चरणबद्ध जनजागरण व आंदोलन करने के लिए विवश होगा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड प्रदेश के विभिन्न जनपदों, ब्लॉकों, मंडलों और संगठनात्मक इकाइयों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों, अभिभावकों और सामाजिक प्रतिनिधियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह 19 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया गया है। सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से एससी-एसटी विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि में वृद्धि करने, पात्रता नियमों में व्यावहारिक शिथिलता लाने और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है। इसके साथ ही इरशाद हुसैन आयोग की रिपोर्ट को तत्काल सार्वजनिक कर उसकी संस्तुतियों पर समयबद्ध कार्रवाई करने, हर साल पारदर्शी और ऑनलाइन काउंसलिंग आधारित न्यायसंगत स्थानांतरण प्रक्रिया लागू करने तथा प्राथमिक स्तर पर अंतरमंडलीय स्थानांतरण सुनिश्चित करने की बात कही गई है। संगठन ने लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को तत्काल शुरू करने, आरक्षण संबंधी संवैधानिक प्रावधानों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने तथा विभागवार बैकलॉग रिक्तियों को भरने के लिए विशेष भर्ती अभियान चलाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है। दुर्गम और अति दुर्गम क्षेत्रों के लिए रोस्टर आधारित संतुलित नियुक्ति एवं स्थानांतरण नीति लागू करने, उच्च व तकनीकी शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं व कोचिंग के लिए एससी-एसटी वर्ग के विद्यार्थियों हेतु छात्रावास तथा डिजिटल सहायता योजनाएं सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा संविदा, उपनल एवं आउटसोर्सिंग सेवाओं में नियमानुसार आरक्षण व्यवस्था लागू करने, अशासकीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए स्थायी व पारदर्शी व्यवस्था बनाने तथा सभी पात्र शिक्षक-कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग की गई है।
ज्ञापन में आगे कहा गया है कि गोल्डन कार्ड योजना के अंतर्गत ओपीडी सहित प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं कैशलेस स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं। साथ ही इंदु कुमार पांडे समिति की अनुशंसाओं पर समयबद्ध कार्रवाई करने, विभागवार एससी-एसटी प्रतिनिधित्व और बैकलॉग रिक्तियों का श्वेत पत्र जारी करने तथा आरक्षण, रोस्टर व पदोन्नति से जुड़े विषयों की निगरानी के लिए उच्च स्तरीय समीक्षा समिति का गठन करने की मांग उठाई गई है। संगठन ने अन्य राज्यों की एससी-एसटी वर्ग की उन महिलाओं को, जिनका विवाह उत्तराखंड में हुआ है, उन्हें उच्चतम न्यायालय के प्रचलित प्रावधानों व राज्य की विधिक व्यवस्था के अनुरूप आरक्षण का लाभ देने के लिए एकरूप नीति बनाने की मांग की है। इसके अतिरिक्त, नीति निर्धारण व विभागीय बैठकों में एससी-एसटी शिक्षक संगठनों को प्रभावी प्रतिनिधित्व देने, वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त रखने तथा शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से दूर रखकर मुख्य रूप से शिक्षण कार्यों तक ही सीमित रखने का आग्रह किया गया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान एसोसिएशन के ब्लॉक अध्यक्ष सूर्य प्रकाश कालाकोटी, ब्लॉक महामंत्री विनोद प्रसाद गंगोला, उपाध्यक्ष संजय कुमार ग्वासीकोटी, कोषाध्यक्ष महेश चंद्र, वरिष्ठ उपाध्यक्ष राधा कृष्ण, मीडिया प्रभारी महेंद्र कुमार, संरक्षक नंदन राम व बलवीर प्रसाद मौजूद रहे। इस अवसर पर संगठन के अन्य सदस्यों में सुरेश चन्द्र, दिनेश कुमार, हिमांशु मोहन, सोनू कुमार, बृजेश कुमार, अखिलेश ग्वासीकोटी, संतोष कुमार, देवानन्द आगरी और अनिल सामियाल सहित कई शिक्षक व कर्मचारी उपस्थित थे।
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