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मध्य प्रदेश: कमीशन कटौती के विरोध में राशन दुकान संचालकों और महिला स्व-सहायता समूहों का प्रदर्शन
- Photo by : social media
संक्षेप
मध्य प्रदेश: उचित मूल्य दुकान संचालकों और महिला स्व-सहायता समूहों ने कमीशन कटौती के विरोध में जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी विभिन्न मांगें रखीं।
विस्तार
मध्य प्रदेश: उचित मूल्य दुकान संचालकों और महिला स्व-सहायता समूहों ने कमीशन कटौती के विरोध में जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी विभिन्न मांगें रखीं। प्रदर्शनकारियों ने कमीशन बढ़ाने सहित 12 सूत्रीय मांगों के समाधान की मांग की। जिला प्रेस रिपोर्टर गोवर्धन कुम्भकार के अनुसार, ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2018 से महिला स्व-सहायता समूह प्रदेशभर में उचित मूल्य दुकानों का संचालन पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं। कोरोना महामारी जैसे कठिन समय में भी इन समूहों और विक्रेताओं ने आम लोगों तक खाद्यान्न पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। विक्रेताओं ने आरोप लगाया कि शासन द्वारा मिलने वाले कमीशन में लगातार कटौती की गई है। पहले जहां कमीशन 10,500 रुपये था, उसे घटाकर 8,500 रुपये और बाद में 5,000 रुपये तक कर दिया गया। बिना पूर्व सूचना और चर्चा के कमीशन कम किए जाने से राशन दुकान संचालकों और महिला समूहों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान कमीशन से दुकान का किराया, बिजली, इंटरनेट, परिवहन, कर्मचारियों का वेतन और अन्य जरूरी खर्च पूरे करना मुश्किल हो गया है। संचालकों ने सरकार से कमीशन बढ़ाकर न्यूनतम 25,000 रुपये करने की मांग की है। ज्ञापन में कमीशन का समय पर भुगतान, प्रत्येक पंचायत स्तर पर उचित मूल्य दुकान के लिए स्थायी भवन उपलब्ध कराने, परिवहन व्यवस्था सुधारने, ऑनलाइन सर्वर और पीओएस मशीन से जुड़ी तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान तथा सेल्समैन को मानदेय देने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, स्वास्थ्य बीमा, शासकीय कर्मचारियों की तरह सम्मान और सुविधाएं देने की मांग भी उठाई गई। विक्रेताओं ने कहा कि भविष्य में कोई भी नई नीति लागू करने से पहले उचित मूल्य दुकान संचालकों और महिला स्व-सहायता समूहों के प्रतिनिधियों से चर्चा की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो मध्य प्रदेशभर के उचित मूल्य दुकान संचालक और महिला स्व-सहायता समूह लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से सामूहिक आंदोलन और हड़ताल करने के लिए बाध्य होंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
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