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गुजरात: क्षमापना पर्व पर गूंजा क्षमा का संदेश, डॉ. अशोक पगारिया बोले—“सबको माफ कर मन को साफ करें”

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गुजरात  Published by: Mehta Himmat Lal , गुजरात  Edited By: Yashoda, Date: 16/09/2026 12:53:27 pm Share:
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  • Published by.: Mehta Himmat Lal ,
  • Edited By.: Yashoda,
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  • 16/09/2026 12:53:27 pm
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संक्षेप

गुजरात: वेसू, सूरत पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन मेवाड़ जैन श्रावक संघ, वेसू के तत्वावधान में जलाराम वाटिका सभागृह में क्षमापना पर्व का आयोजन किया गया।

विस्तार

गुजरात: वेसू, सूरत पर्युषण महापर्व के अंतिम दिन मेवाड़ जैन श्रावक संघ, वेसू के तत्वावधान में जलाराम वाटिका सभागृह में क्षमापना पर्व का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पुणे से पधारे स्वाध्यायी डॉ. अशोक कुमार पगारिया ने क्षमापना पर्व के महत्व पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि यह पर्व अपनी गलतियों को पहचानने, अहंकार को त्यागने, मन को हल्का करने और दूसरों से क्षमा मांगने का अवसर प्रदान करता है।

डॉ. पगारिया ने कहा कि क्षमापना पर्व का संबंध केवल धार्मिक परंपरा से नहीं, बल्कि हृदय की शुद्धि, रिश्तों की मधुरता, मन की निर्मलता और आत्मा की पवित्रता से भी है। उन्होंने कहा कि इस पर्व के माध्यम से परिवार में प्रेम, संघ में संगठन और समाज में आपसी समझ को मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि अपनी गलती या वाणी से जिन लोगों को दुख पहुंचा है, उनसे क्षमा मांगें। साथ ही, जो लोग क्षमायाचना करें, उन्हें भी उदारता के साथ माफ करना चाहिए। उन्होंने कहा, “सबको माफ कर दो, अपने मन को साफ कर दो।” क्षमा करने से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति स्वयं को मानसिक बोझ से मुक्त महसूस करता है।

आठ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन

पर्युषण महापर्व के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों को संपन्न कराने के लिए पुणे से डॉ. अशोक कुमार पगारिया, शांतिलाल जी फुलफगर तथा जोधपुर से सुनील जी चोपड़ा पहुंचे। डॉ. पगारिया ने विभिन्न विषयों पर प्रवचन दिए। सुनील जी चोपड़ा ने सूत्र वाचन और संबंधित विषयों पर मार्गदर्शन किया, जबकि शांतिलाल जी फुलफगर ने मंगल पाठ और प्रत्याख्यान करवाया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में मेवाड़ जैन श्रावक संघ के अध्यक्ष अनिल जी डांगी, महामंत्री नितिन जी कोटिफोडा, कोषाध्यक्ष कल्पेश जी कोठारी, मंत्री कुलदीप जी चंडालिया सहित महिला शाखा और युवा शाखा के पदाधिकारियों तथा नवयुवकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं शामिल हुए और धर्मध्यान का लाभ लिया। इस दौरान कई श्रद्धालुओं ने आत्मशुद्धि के लिए तपस्या भी की।


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