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उत्तर प्रदेश: मार्च 2027 तक सभी टोल बूथ होंगे बैरियर-फ्री, बिना रुके कटेगा टोल टैक्स
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: देशभर में हाईवे से सफर करने वाले लोगों के लिए टोल प्लाजा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: देशभर में हाईवे से सफर करने वाले लोगों के लिए टोल प्लाजा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के मुताबिक, मार्च 2027 तक देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल बूथ को बैरियर-फ्री करने का लक्ष्य रखा गया है। दिसंबर 2026 के अंत तक 70 फीसदी से ज्यादा टोल बूथ को इस व्यवस्था में लाने की योजना है। नई व्यवस्था में FASTag के साथ ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन यानी ANPR और मल्टी-लेन फ्री-फ्लो यानी MLFF तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इसका मतलब है कि वाहन को टोल प्लाजा पर पारंपरिक बैरियर के सामने रुकने की जरूरत नहीं होगी। सिस्टम वाहन की पहचान करके इलेक्ट्रॉनिक तरीके से टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी करेगा। गडकरी के मुताबिक, देश में करीब 13 करोड़ FASTag जारी किए जा चुके हैं और राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल कलेक्शन का 98 फीसदी से ज्यादा हिस्सा डिजिटल तरीके से हो रहा है। FASTag की वजह से टोल कलेक्शन में भी बढ़ोतरी हुई है और कुल टोल आय 82 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंचने की जानकारी दी गई है। नई व्यवस्था से टोल प्लाजा पर लगने वाला इंतजार कम होने की उम्मीद है। गडकरी के अनुसार, पहले एक वाहन को औसतन करीब 12 मिनट तक रुकना पड़ता था। डिजिटल और फ्री-फ्लो व्यवस्था से समय और ईंधन दोनों की बचत हो सकती है। सरकार के अनुसार, टोल प्लाजा पर कम इंतजार से हर साल करीब 5,250 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत का अनुमान है। राजस्व को लेकर भी सरकार को फायदा होने की उम्मीद जताई गई है। गडकरी के मुताबिक, FASTag के इस्तेमाल से टोल आय में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। पूरी व्यवस्था लागू होने पर सरकार को सालाना करीब 20 हजार से 25 हजार करोड़ रुपये का लाभ होने का अनुमान बताया गया है। इस तकनीक की दिशा में 11 मई 2026 को दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II पर मुंडका-बक्करवाला में देश की पहली बैरियर-लेस टोलिंग व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके तहत MLFF तकनीक के जरिए वाहनों को बिना पारंपरिक टोल बैरियर के आगे बढ़ने की सुविधा दी गई। यानी आने वाले समय में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल देने का तरीका बदलने वाला है। गाड़ियों को टोल बूथ पर रोकने के बजाय तकनीक के जरिए उनकी पहचान और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में सरकार आगे बढ़ रही है।
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