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उत्तर प्रदेश: सोशल मीडिया से हुई मृत पिता की पहचान, बेटी ने राप्ती नदी में अस्थियां विसर्जित कर दी अंतिम विदाई
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: गोरखपुर अपनों के लापता होने की पीड़ा तब और बढ़ जाती है, जब लंबे समय तक उनकी कोई खबर नहीं मिलती। गोरखपुर में मातृ आंचल सेवा संस्थान के ‘अंतिम ममता अभियान’ के माध्यम से ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के सहारे एक बेटी अपने दिवंगत पिता की पहचान कर सकी।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: गोरखपुर अपनों के लापता होने की पीड़ा तब और बढ़ जाती है, जब लंबे समय तक उनकी कोई खबर नहीं मिलती। गोरखपुर में मातृ आंचल सेवा संस्थान के ‘अंतिम ममता अभियान’ के माध्यम से ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें सोशल मीडिया पर मिली जानकारी के सहारे एक बेटी अपने दिवंगत पिता की पहचान कर सकी। पिता की मृत्यु के बाद उनकी तलाश कर रहे परिवार को जब सच्चाई का पता चला, तो बेटी ने उनकी अस्थियां प्राप्त कर राप्ती नदी में विसर्जित कीं और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम विदाई दी। जानकारी के अनुसार, पिपरौली निवासी रमेश का शव 28 अगस्त 2026 को मिला था। निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करने और 72 घंटे तक परिजनों का पता लगाने के प्रयासों के बावजूद उनकी पहचान नहीं हो सकी। इसके बाद 2 सितंबर 2026 को मातृ आंचल सेवा संस्थान, गोरखनाथ की ओर से संचालित अंतिम ममता अभियान के तहत राजघाट पर सनातन परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार कराया गया। रमेश अपने पीछे पत्नी, बेटे और बेटी को छोड़ गए थे, जो उस समय उनके बारे में कोई जानकारी नहीं जुटा पा रहे थे। 25 अक्टूबर 2026 को रमेश की बेटी पूनम गौड़ को सोशल मीडिया पर अंतिम ममता अभियान से संबंधित जानकारी मिली। इसके बाद वह अपने पिता की तस्वीर लेकर मातृ आंचल सेवा संस्थान के आश्रम पहुंचीं। तस्वीर और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान करने पर रमेश की पहचान की पुष्टि हुई। संस्थान की ओर से उन्हें बताया गया कि उनके पिता का अंतिम संस्कार सितंबर में ही किया जा चुका है। पिता की मृत्यु की जानकारी मिलने पर पूनम भावुक हो गईं। लंबे समय से जिस पिता की तलाश की जा रही थी, उनके बारे में जानकारी मिलने से एक ओर अनिश्चितता समाप्त हुई, तो दूसरी ओर अंतिम दर्शन न कर पाने का दुख भी सामने आया। बाद में उन्होंने अपने पिता की अस्थियां प्राप्त करने की इच्छा जताई। संस्थान की संस्थापिका एवं संचालिका पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ उन्हें राजघाट लेकर पहुंचीं, जहां अस्थि कलश सौंपा गया। इसके बाद पूनम ने राप्ती नदी में अपने पिता की अस्थियों का विसर्जन किया। इस दौरान नगर निगम के विनोद राय भी मौजूद रहे। सोशल मीडिया से पहले भी परिवारों तक पहुंची जानकारी पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से दिवंगत लोगों की पहचान उनके परिवारों तक पहुंचाने में पहले भी मदद मिली है। उन्होंने बताया कि पिछले महीने अभियान के तहत अंतिम संस्कार किए गए दो अज्ञात व्यक्तियों की पहचान उनके परिजनों ने सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों से की थी। इनमें एक परिवार बड़हलगंज और दूसरा आजमगढ़ का था। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों परिवारों को अस्थि कलश सौंपे गए। संस्थान का मानना है कि अज्ञात शवों की पहचान से जुड़ी जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने से उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं। बेसहारा महिलाओं को भी मिल रहा सहारा मातृ आंचल सेवा संस्थान की गतिविधियां केवल अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं हैं। नगर निगम गोरखपुर के सहयोग से मोहरीपुर में ‘अम्मा आश्रय निकेतन’ भी संचालित किया जा रहा है। यहां निराश्रित, परित्यक्त, बीमार, बुजुर्ग और शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग महिलाओं को आश्रय और देखभाल उपलब्ध कराई जाती है। आश्रय निकेतन में रहने वाली कई महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें दैनिक गतिविधियों के लिए भी दूसरों की सहायता की जरूरत पड़ती है। उनके लिए भोजन, कपड़े, दवाइयां, डायपर, स्वच्छता सामग्री और नियमित देखभाल आवश्यक है। संस्थान की ओर से इन जरूरतों को पूरा करने के साथ महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देने का प्रयास किया जाता है। पुष्पलता सिंह ‘अम्मा’ के मुताबिक, आश्रय निकेतन के लिए भवन नगर निगम ने उपलब्ध कराया है, जबकि भोजन, दवाइयों और अन्य दैनिक जरूरतों का खर्च संस्थान अपने संसाधनों से उठाता है। उन्होंने बताया कि इन कार्यों के लिए नियमित सरकारी आर्थिक सहायता नहीं मिलती, जिससे व्यवस्थाएं बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद संस्थान का प्रयास है कि कोई भी असहाय महिला आवश्यक देखभाल और सम्मानजनक जीवन से वंचित न रहे।
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