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बिहार: पति की हत्या कर शव के टुकड़े करने के मामले में पत्नी को उम्रकैद

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राज कुमार पासवान/उत्तर प्रदेश  Published by: , राज कुमार पासवान/उत्तर प्रदेश  Edited By: Yashoda Bahuguna, Date: 27/10/2026 10:10:58 am Share:
  • राज कुमार पासवान/उत्तर प्रदेश
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संक्षेप

बिहार: बिहार के नवादा जिले में पति की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पत्नी सरिता देवी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। व्यवहार न्यायालय, नवादा में एडीजे-9 की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया।

विस्तार

बिहार: बिहार के नवादा जिले में पति की निर्मम हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी पत्नी सरिता देवी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। व्यवहार न्यायालय, नवादा में एडीजे-9 की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास के साथ 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना नहीं देने पर छह महीने के अतिरिक्त कारावास का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, अदालत ने शव को ठिकाने लगाने से संबंधित धारा 201 के तहत भी सरिता देवी को सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। इस मामले में पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यह मामला रोह थाना कांड संख्या 81/2024 और सेशन ट्रायल संख्या 472/2024 से संबंधित है। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से वरिष्ठ अपर लोक अभियोजक राम प्रताप लाल ने पक्ष रखा और अदालत से अभियुक्त को कड़ी सजा देने की अपील की। अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, सरिता देवी पर अपने पति सुनील रजक की हत्या करने और शव को करीब 10 टुकड़ों में काटकर बोरों में भरकर अलग-अलग स्थानों पर फेंकने का आरोप था। बताया गया कि घटना के बाद मामले से बचने के लिए वह खुद ही सूचक बन गई थी। हालांकि, पुलिस की जांच और अभियोजन पक्ष की ओर से प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों के आधार पर मामला अदालत में पहुंचा और सुनवाई के बाद दोषसिद्धि हुई।

अदालत में फैसला सुनाए जाने के बाद सरिता देवी भावुक हो गई और रोने-गिड़गिड़ाने लगी। इस मामले में नवादा पुलिस की जांच और वरिष्ठ अपर लोक अभियोजक राम प्रताप लाल की ओर से की गई पैरवी को महत्वपूर्ण बताया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से अदालत के सामने रखने के कारण आरोपी को सजा दिलाने में सफलता मिली। इस फैसले को हत्या जैसे गंभीर अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों की अहमियत के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने मामले में हत्या और साक्ष्य मिटाने से संबंधित अपराधों के लिए अलग-अलग सजाएं सुनाई हैं।

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