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उत्तर प्रदेश: गोंडा के छावनी क्षेत्र में विकास के दावों पर सवाल, दो गांवों में सड़क की बदहाली से ग्रामीण परेशान

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उत्तर प्रदेश  Published by: Rakesh Kumar(UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 10/09/2026 01:38:50 pm Share:
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  • Published by.: Rakesh Kumar(UP) ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
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  • 10/09/2026 01:38:50 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गोंडा शहर से महज करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित छावनी सरकार क्षेत्र के दो गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गोंडा शहर से महज करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित छावनी सरकार क्षेत्र के दो गांवों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद गांवों में पक्की सड़क, नाली और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। बारिश के मौसम में कच्चे रास्तों पर कीचड़ और जलभराव की समस्या बढ़ जाने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ग्रामीण मोहम्मद सिद्दीक के अनुसार, उनका घर शहर से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और गांव में लगभग 400 परिवार रहते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में उन्होंने अपना मकान बनवाया था, लेकिन तब से अब तक गांव की सड़क की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 1989 में चकबंदी के बाद से सड़क की समस्या बनी हुई है और अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया।

बारिश के दिनों में कच्ची सड़क पर स्थिति और खराब हो जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी स्कूल करीब आधा किलोमीटर दूर है, लेकिन बारिश के दौरान कीचड़ के कारण बच्चों को स्कूल आने-जाने में दिक्कत होती है और कई बार बच्चे रास्ते में गिर भी जाते हैं। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी समस्या बताई। उनका आरोप है कि गांव के अंदर खराब रास्ते के कारण एंबुलेंस आसानी से नहीं पहुंच पाती। गंभीर मरीजों को कथित तौर पर करीब एक किलोमीटर पहले वाहन तक ले जाना पड़ता है। ऐसे में मरीजों को कंधे पर उठाकर ले जाने की स्थिति बन जाती है।

इसके अलावा ग्रामीणों ने करीब ढाई बीघा ग्राम समाज और नजूल की जमीन पर कथित कब्जे का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ लोगों ने जमीन पर गोबर और पशुओं के तबेले बना रखे हैं, जिससे घरों के आसपास गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी रहती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कराकर सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित ग्राम प्रधान और प्रशासनिक स्तर पर सड़क तथा सफाई की समस्या को लेकर शिकायत की, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो सका। दूसरे गांव के ग्रामीणों ने भी अपनी समस्याएं बताते हुए कहा कि चुनाव के दौरान नेता गांव में आते हैं और विकास के वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद समस्याएं जस की तस रह जाती हैं। 

ग्रामीणों के अनुसार, खेतों के बीच से गुजरने वाला कच्चा रास्ता ही उनके आवागमन का प्रमुख मार्ग है। सड़क और नाली की सुविधा नहीं होने के कारण बरसात में ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि दोनों गांवों की सड़क का स्थायी निर्माण कराया जाए, जलनिकासी की व्यवस्था की जाए और ग्राम समाज की कथित ढाई बीघा जमीन की जांच कराकर उसे अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि शहर के नजदीक होने के बावजूद यदि गांवों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना रहता है तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।