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उत्तर प्रदेश: महर्षि वाल्मीकि जयंती पर दो भव्य आयोजन, 1,700 मेधावी छात्र-छात्राएं को किया सम्मानित
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: बलरामपुर महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर बलरामपुर जिले में सोमवार को दो अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। शक्ति स्मारक संस्थान, दुल्हिनपुर में प्रतिभा सम्मान समारोह के दौरान 64 विद्यालयों के 1,700 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। वहीं, मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में भी महर्षि वाल्मीकि की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: बलरामपुर महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर बलरामपुर जिले में सोमवार को दो अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। शक्ति स्मारक संस्थान, दुल्हिनपुर में प्रतिभा सम्मान समारोह के दौरान 64 विद्यालयों के 1,700 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। वहीं, मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में भी महर्षि वाल्मीकि की जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। प्रतिभा सम्मान समारोह में सम्मानित हुए विद्यार्थी शक्ति स्मारक संस्थान, दुल्हिनपुर में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में कैसरगंज के निवर्तमान सांसद एवं भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह शामिल हुए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों और प्रतिभा को प्रोत्साहित करते हुए उन्हें सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा, मेहनत और उपलब्धियां देश के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं। उन्होंने शिक्षा के माध्यम से युवाओं को आगे बढ़ाने और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही सम्मानित छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में सदर विधायक पलटू राम सहित अन्य जनप्रतिनिधि, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में वाल्मीकि जयंती समारोह दूसरी ओर, मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय में महर्षि वाल्मीकि जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में उनके जीवन, साहित्य और आदर्शों पर प्रकाश डाला गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि सत्य, साधना और संस्कार समाज तथा राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि को भारतीय संस्कृति का महान ऋषि और आदिकवि बताते हुए कहा कि उनकी रचना 'रामायण' मानव जीवन को नैतिकता, धर्म और आदर्शों का मार्ग दिखाती है। कुलपति ने कहा कि रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है। उन्होंने उपस्थित लोगों से महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़े सत्य, अनुशासन और मानवता के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया। समारोह में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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