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बिहार: रेलवे स्टेशन के पास प्रस्तावित आरओबी के जाम से राहत पाने के लिए किया गया समाधान

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बिहा  Published by: Sajid Hossain , Date: 16/01/2026 02:13:14 pm Share:
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  • 16/01/2026 02:13:14 pm
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संक्षेप

बिहार: नवादा शहर में रेलवे स्टेशन के निकट प्रस्तावित रेल ओवर ब्रिज (ROB) केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि शहर को वर्षों से जकड़े भीषण जाम से मुक्ति दिलाने का एक ठोस और दूरदर्शी प्रयास है।

विस्तार

बिहार: नवादा शहर में रेलवे स्टेशन के निकट प्रस्तावित रेल ओवर ब्रिज (ROB) केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि शहर को वर्षों से जकड़े भीषण जाम से मुक्ति दिलाने का एक ठोस और दूरदर्शी प्रयास है। इस परियोजना को लेकर कई चरणों में सर्वेक्षण हो चुका है, तकनीकी मंज़ूरी मिल चुकी है और बजट भी स्वीकृत है। इसके बावजूद कुछ स्वार्थी तत्वों द्वारा इसका संगठित विरोध किया जा रहा है, जो बेहद चिंताजनक है। जनता को भ्रमित करने के लिए चार वैकल्पिक रूट प्रस्तावित किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि इन चारों रूट से जाम की समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकलता। ये सभी रूट केवल जाम को नवादा शहर से हटाकर पार नवादा की ओर डायवर्ट कर देते हैं। यानी समस्या का समाधान नहीं, सिर्फ जाम का  स्थानांतरण होना है। पार नवादा की ओर ट्रैफिक डायवर्ट करने का प्रस्ताव पूरी तरह से अव्यावहारिक है । चार नकली रूट उछाले जा रहे हैं, ताकि जाम हटे नहीं  बस पार नवादा में ठेल दिया जाए। ये प्लान विकास का नहीं अतिक्रमण बचाने का हथकंडा है।

 

यह रूट लंबा और घुमावदार होगा, जिससे आम जनता को अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ेगी, जिस बजट में मौजूदा आरओबी स्वीकृत है। उससे दस गुना अधिक लागत पार नवादा से रुट डायवर्जन में आएगी। पार नवादा क्षेत्र में पहले से सीमित सड़कें हैं; वहां ट्रैफिक डालने से  विकराल जाम की स्थिति उत्पन्न होगी। इसका सीधा असर स्कूल, अस्पताल, व्यापार और आपात सेवाओं पर पड़ेगा। नवादा शहर में जाम की समस्या खत्म नहीं होगी, बल्कि और भी गंभीर हो जाएगी। पार नवादा के साथ-साथ मुख्य नवादा भी प्रभावित होगा। आने वाले वर्षों में शहर का नियोजित विकास पूरी तरह अवरुद्ध हो जाएगा। यह स्पष्ट रूप से जनहित और निजी हित के बीच की लड़ाई है। कुछ लोग अपने अवैध मकान-दुकान बचाने के लिए पूरे शहर को ट्रैफिक नरक बनाने पर आमादा हैं। नवादा को जाम-मुक्त, सुरक्षित और विकसित शहर बनाना है तो रेलवे स्टेशन के निकट प्रस्तावित आरओबी ही एकमात्र व्यावहारिक समाधान है। अवैध अतिक्रमण को बचाने के लिए शहर के भविष्य से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अब समय आ गया है कि नवादा की जागरूक जनता भ्रम की राजनीति को पहचाने और विकास के साथ खड़ी हो।