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दिल्ली: पुलिस मुख्यालय पर प्रदर्शन के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ निलंबित

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दिल्ली  Published by: Tarik Ali , दिल्ली  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 03/11/2026 01:38:36 pm Share:
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संक्षेप

दिल्ली: दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच शाहदरा थाने में शुरू हुआ विवाद अब पुलिस विभाग के भीतर बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम में बदल गया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर सोमवार को पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन के एक दिन बाद

विस्तार

दिल्ली: दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच शाहदरा थाने में शुरू हुआ विवाद अब पुलिस विभाग के भीतर बड़े प्रशासनिक घटनाक्रम में बदल गया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर सोमवार को पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन के एक दिन बाद मंगलवार को गृह मंत्रालय ने ACP मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। मीडिया रिपोर्टों और पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को हुए प्रदर्शन में ACP मनस्वी वशिष्ठ की सक्रिय भूमिका थी और निलंबन की कार्रवाई इसी घटनाक्रम के बाद की गई। दरअसल, पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प से हुई थी। इस घटना में अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट लगने की बात सामने आई थी। वकीलों ने आरोप लगाया था कि जब अधिवक्ता मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे तो ACP मनस्वी वशिष्ठ ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और अपनी सर्विस रिवॉल्वर भी दिखाई। इन आरोपों के बाद वकीलों में नाराजगी फैल गई और दिल्ली की विभिन्न जिला अदालतों में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन और काम से दूरी बनाने का फैसला किया।

विवाद बढ़ने के बाद 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ का गांधी नगर सब-डिवीजन से स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) में तबादला कर दिया गया, जबकि शाहदरा थाने के SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी यूनिट भेज दिया गया। इन तबादलों के बाद पुलिसकर्मियों के एक वर्ग में नाराजगी बढ़ गई। PHQ के बाहर जुटे सैकड़ों पुलिसकर्मी इसी नाराजगी के चलते 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार के तबादले वापस लिए जाएं। पुलिसकर्मियों ने हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर अपनी मांगें रखीं। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने वकीलों द्वारा पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और धमकियों का मुद्दा भी उठाया। कुछ रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 500 तक बताई गई है, हालांकि अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में संख्या को लेकर अंतर है।

प्रदर्शन के दौरान नई दिल्ली के DCP सचिन शर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर पुलिसकर्मियों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने उन्हें अनुशासन बनाए रखने और अपनी शिकायतें विभागीय माध्यम से रखने की सलाह दी। इसके बावजूद पुलिसकर्मी अपनी मांगों पर अड़े रहे। ACP मनस्वी वशिष्ठ ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर पुलिसकर्मियों की समस्याओं को वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाने की बात कही।
पुलिस कमिश्नर के साथ हुई बैठक, रखीं पांच प्रमुख मांगें दिनभर चले घटनाक्रम के बाद पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और वरिष्ठ अधिकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ बैठक की। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने अपनी शिकायतें और मांगें रखीं। इनमें वकीलों से जुड़े विवादों में पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, शिकायतों के निपटारे के लिए कमेटी का गठन, थानों और अदालत परिसरों में टकराव की स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट SOP तैयार करने तथा ACP की शिकायत पर दर्ज FIR को रद्द नहीं किए जाने जैसी मांगें शामिल थीं। अधिकारियों की ओर से पुलिसकर्मियों की वास्तविक समस्याओं पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।

प्रदर्शन के बाद ACP पर गिरी गाज सोमवार को मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन के बाद मंगलवार को ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की खबर सामने आई। टाइम्स ऑफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और अन्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने अनुशासनात्मक आधार पर यह कार्रवाई की है। पुलिस सूत्रों ने निलंबन पत्र मिलने की जानकारी दी है। हालांकि, निलंबन आदेश में दर्ज विस्तृत कारणों और विभागीय जांच की स्थिति को लेकर आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली पुलिस के भीतर पुलिसकर्मियों की शिकायतों, विभागीय अनुशासन और पुलिस-वकील संबंधों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, मंगलवार को ACP के निलंबन के बाद रोहिणी कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपना प्रस्तावित कार्य बहिष्कार भी वापस लेने की घोषणा की और वकीलों से नियमित न्यायिक कार्य में लौटने की अपील की। अब सबकी नजर इस बात पर है कि शाहदरा विवाद की जांच और पुलिसकर्मियों की शिकायतों पर आगे क्या कार्रवाई होती है।


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