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गुजरात: देश में पहली बार वंदे भारत एक्सप्रेस से पहुंचाया गया जीवित हृदय, 3 घंटे 45 मिनट में सूरत से अहमदाबाद पहुंचा
- Photo by : social media
संक्षेप
गुजरात: इस हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के लिए पहले हॉस्पिटल से स्टेशन तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके बाद हार्ट को अहमदाबाद के एक कार्डियक टीचिंग अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचाया गया।
विस्तार
गुजरात: इस हार्ट ट्रांसप्लांटेशन के लिए पहले हॉस्पिटल से स्टेशन तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। इसके बाद हार्ट को अहमदाबाद के एक कार्डियक टीचिंग अस्पताल में ट्रांसप्लांट के लिए पहुंचाया गया। अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, वह व्यक्ति 28 जुलाई को अपने किराए के घर पर गंभीर रूप से बीमार पड़ गया था। उसकी हालत तेजी से बिगड़ी। उसका चेहरा एक तरफ़ मुड़ गया और हाथ-पैर काम करना बंद कर गए। उसे पहले पास के अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए 108 एम्बुलेंस से NCH सूरत भेजा गया। 30 जुलाई को जांच के बाद, रेजिडेंट मेडिकल ऑफ़िसर (RMO) केतन नाइक, प्लास्टिक सर्जन नीलेश कछड़िया, न्यूरोलॉजिस्ट प्रयाग मकवाना और न्यूरोसर्जन केयूर प्रजापति की मेडिकल टीम ने उसे ब्रेन-डेड घोषित कर दिया। अंगदान चैरिटेबल ट्रस्ट, वॉलंटियर इक़बाल कदीवाला और काउंसलर निर्मला कथुडे ने परिवार को अंग दान के महत्व के बारे में समझाया। भारतीय रेलवे ने देश में पहली बार ट्रेन के जरिए लाइव हार्ट का ट्रांसपोर्ट सफलतापूर्वक पूरा किया है। सूरत से अहमदाबाद तक दिल को मुंबई सेंट्रल-गांधीनगर कैपिटल वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए ले जाया गया, ताकि यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर में ट्रांसप्लांट किया जा सके। ट्रेन नंबर 20901 से भेजा गया यह हार्ट निर्धारित समय सीमा के भीतर अहमदाबाद पहुंच गया। इस पूरे ऑपरेशन के लिए भारतीय रेलवे, गुजरात पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) और मेडिकल टीमों के बीच समन्वय किया गया ताकि अंग को बिना किसी देरी के पहुंचाया जा सके। अहमदाबाद के मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने कहा कि यह ऑपरेशन भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय रेलवे के लिए बेहद गर्व और संतोष का पल है कि वंदे भारत एक्सप्रेस के जरिए सूरत से अहमदाबाद तक एक लाइव हार्ट को सुरक्षित और समय पर पहुंचाया गया। ऐसे जीवन रक्षक अभियानों में हर पल महत्वपूर्ण होता है। भारतीय रेलवे, आरपीएफ, गुजरात राज्य पुलिस और मेडिकल टीमों के बीच शानदार समन्वय से यह मिशन सफल हुआ। हमारे लिए किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में भूमिका निभाना सिर्फ जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा और मानवता का सर्वोच्च कर्तव्य है। मिशन के लिए ऐसे बनाई गई टीम रेल प्रशासन के अनुसार, वंदे भारत एक्सप्रेस की रफ्तार, समयनिष्ठता और विश्वसनीयता ही मुख्य कारण थे जिससे अंग को ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी सीमित समय-सीमा के भीतर गंतव्य तक पहुंचाया जा सका। इस मिशन में भारतीय रेलवे के कई विभागों के साथ-साथ डॉक्टर, अंग प्रत्यारोपण समन्वयक, आरपीएफ कर्मी, गुजरात राज्य पुलिस अधिकारी और अन्य अधिकारी भी शामिल थे।अधिकारियों ने बताया कि सभी एजेंसियों के बीच करीबी समन्वय के कारण यह समय-संवेदनशील ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा हो सका। यह देश में पहली बार है जब ट्रांसप्लांट के लिए ट्रेन के जरिए लाइव हार्ट ले जाया गया है। इससे यात्री और माल सेवाओं के साथ-साथ आपातकालीन मेडिकल लॉजिस्टिक्स में भी रेल नेटवर्क की भूमिका और बढ़ गई है।
ट्रेन के अहमदाबाद रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद आरपीएफ और गुजरात पुलिस ने प्लेटफॉर्म नंबर 1 से यू.एन. मेहता इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी एंड रिसर्च सेंटर तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया। इस समर्पित रूट की मदद से दिल को तेजी से अस्पताल तक पहुंचाया गया, ताकि तय समय में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की जा सके। 3 घंटे 45 मिनट में पहुंचा हार्ट समय के लिहाज़ से बहुत अहम इस सफ़र में लगभग 217 मिनट लगे, जिससे हृदय को सफल ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी समय-सीमा के भीतर पहुंचाया जा सका। यह हार्ट, दो किडनी और एक लिवर, सूरत के न्यू सिविल हॉस्पिटल (NCH) में ओडिशा के एक 36 वर्षीय टेक्सटाइल वर्कर से निकाले गए थे, जो सूरत जिले के किम में रहते थे। अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि कई अंगों के इस दान से चार मरीजों को नई जिंदगी मिल सकती है और यह NCH सूरत द्वारा किया गया 96वां अंग दान था।
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