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Honey Trap Case: हनी ट्रैप का काला खेल, अंडरवर्ल्ड से ISI तक का नेटवर्क
- Photo by : social media
संक्षेप
पश्चिम बंगाल: भारत में जासूसी और हनी ट्रैप के मामलों को लेकर समय-समय पर कई खुलासे सामने आते रहे हैं।
विस्तार
पश्चिम बंगाल: भारत में जासूसी और हनी ट्रैप के मामलों को लेकर समय-समय पर कई खुलासे सामने आते रहे हैं। हाल के वर्षों में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पर सोशल मीडिया और फर्जी पहचान के जरिए लोगों को हनी ट्रैप में फंसाने के आरोप लगे हैं। हालांकि, इस तरह की रणनीति नई नहीं है। एक चर्चित पुस्तक में दावा किया गया है कि इससे पहले अंडरवर्ल्ड भी खूबसूरत लड़कियों के संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल कर प्रभावशाली लोगों, कारोबारियों और अधिकारियों को अपने जाल में फंसाता था। किताब के अनुसार, यह नेटवर्क पहले दोस्ती बढ़ाता, फिर महंगी पार्टियों, उपहारों और निजी मुलाकातों के जरिए लक्ष्य का भरोसा जीतता था। इसके बाद आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो या संवेदनशील जानकारी जुटाकर ब्लैकमेल किया जाता था। इस तरीके का इस्तेमाल धन उगाही, गोपनीय सूचनाएं हासिल करने और अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए किया जाता था। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल दौर में हनी ट्रैप के तरीके बदल गए हैं। अब सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और फर्जी प्रोफाइल के जरिए लोगों से संपर्क कर उन्हें निशाना बनाया जाता है। सुरक्षा एजेंसियां लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह देती हैं और अनजान लोगों से ऑनलाइन दोस्ती, निजी जानकारी साझा करने या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचने की अपील करती हैं। हालांकि, किताब में किए गए दावों को उसके लेखक के दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए। किसी भी विशिष्ट व्यक्ति या संगठन से जुड़े आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों या आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही मानी जानी चाहिए।
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