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मध्य प्रदेश: भीषण गर्मी के बीच पक्षियों के लिए सकोरे लगाए गए, समाजसेवियों की पहल सराहनीय
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संक्षेप
मध्य प्रदेश: पोरसा भीषण गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच जहां इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी और भोजन के लिए जूझ रहे हैं, वहीं पोरसा के मुक्तिधाम परिसर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली।
विस्तार
मध्य प्रदेश: पोरसा भीषण गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच जहां इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान पक्षी भी पानी और भोजन के लिए जूझ रहे हैं, वहीं पोरसा के मुक्तिधाम परिसर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। समाजसेवा और जीवदया की भावना को साकार करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मुक्तिधाम के संरक्षक समाजसेवी डॉ. अनिल गुप्ता के सानिध्य में परिसर में एक दर्जन सकोरे (मिट्टी के पात्र) टांगे गए और पक्षियों के लिए दाने की भी व्यवस्था की गई। इस सेवा कार्य में ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बीके रेखा बहन, पूर्व भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष रामकुमार गुप्ता, श्रीमती लक्ष्मी गुप्ता, महेश चंद्र पेगोरिया, रामधुन बघेल, नरेंद्र राठौर, संजय अग्रवाल, क्षया शर्मा, संतोषी तोमर, रूबी, कल्याण सिंह फौजी सहित अनेक समाजसेवियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सकोरों में दिन में तीन बार भरा जाएगा पानी समाजसेवियों ने न केवल सकोरे टांगे, बल्कि उनकी नियमित देखरेख की जिम्मेदारी भी अपने ऊपर ली है। तय किया गया है कि इन सकोरों में दिन में तीन बार शुद्ध पानी भरा जाएगा, ताकि भीषण गर्मी में पक्षियों को राहत मिल सके। क्यों जरूरी है पक्षियों के लिए पानी और दाना? गर्मी के मौसम में तापमान लगातार बढ़ने से प्राकृतिक जल स्रोत सूखने लगते हैं। ऐसे में पक्षियों के सामने जीवन संकट खड़ा हो जाता है। सकोरों में पानी और दाना रखने से पक्षियों को निर्जलीकरण (डिहाइड्रेशन) से बचाया जा सकता है। उनकी जीवन रक्षा होती है, पर्यावरण का संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है, जैव विविधता (बायोडायवर्सिटी) सुरक्षित रहती है, जीव सेवा का धार्मिक और सामाजिक महत्व भारतीय संस्कृति में बेजुबान जीवों की सेवा को पुण्य कार्य माना गया है। मान्यता है कि पशु-पक्षियों को पानी और अन्न देने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। पक्षियों की सेवा से मिलने वाले लाभ, मन को शांति और संतोष प्राप्त होता है, बच्चों और समाज में संवेदनशीलता बढ़ती है, पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता आती है, यह छोटी पहल बड़े स्तर पर जीवन बचाने का माध्यम बनती है। मुक्तिधाम में की गई यह पहल समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है। बढ़ती गर्मी में यदि हर व्यक्ति अपने घर, छत या आंगन में एक सकोरा रखे, तो हजारों पक्षियों की जान बचाई जा सकती है। इस अवसर पर पूरे मुक्तिधाम परिसर में सेवा, संवेदना और करुणा का भाव देखने को मिला, जिसने यह संदेश दिया कि मानवता सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं, बल्कि हर जीव के प्रति दया ही सच्ची सेवा है।
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