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पंजाब  Published by: Kimmy Arora , पंजाब  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 11/09/2026 05:53:53 pm Share:
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  • Published by.: Kimmy Arora ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 11/09/2026 05:53:53 pm
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संक्षेप

पंजाब: दिल्ली के साकेत इलाके में पिछले दिनों पुलिस द्वारा दो महिला पत्रकारों से पहचान पूछने के बाद की गई कथित बेरहमी से मारपीट के विरोध में आज मालेरकोटला जिला प्रेस क्लब की ओर से प्रधान शहाबुद्दीन के नेतृत्व में डिप्टी

विस्तार

पंजाब: दिल्ली के साकेत इलाके में पिछले दिनों पुलिस द्वारा दो महिला पत्रकारों से पहचान पूछने के बाद की गई कथित बेरहमी से मारपीट के विरोध में आज मालेरकोटला जिला प्रेस क्लब की ओर से प्रधान शहाबुद्दीन के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर मालेरकोटला के कार्यालय के सामने जोरदार रोष प्रदर्शन एवं धरना दिया गया। इस दौरान केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। रोष प्रदर्शन के दौरान स्थानीय कॉलेज चौक से नारेबाजी करते हुए पत्रकार जब ज्ञापन देने के लिए डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के गेट पर पहुंचे तो डीसी साहब अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे। मौके पर मौजूद डीसी कार्यालय के स्टाफ की ओर से जब सुपरिंटेंडेंट ज्ञापन लेने के लिए पत्रकारों के पास पहुंचे तो पत्रकारों ने सुपरिंटेंडेंट को ज्ञापन देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे किसी जिला स्तरीय अधिकारी की मौजूदगी के बिना किसी अन्य अधिकारी को अपना ज्ञापन नहीं देंगे।

हैरानी तब हुई जब पता चला कि जिला कॉम्प्लेक्स कार्यालय में कोई भी जिला अधिकारी मौजूद नहीं था। यहां तक कि डीसी कार्यालय में डीसी की गैरमौजूदगी में कोई ड्यूटी अधिकारी भी मौजूद नहीं था। पत्रकारों ने जब डीसी कार्यालय के कर्मचारियों से सभी गैरहाजिर जिला अधिकारियों के बारे में पूछा तो किसी के पास भी कोई ठोस जवाब नहीं था।

उल्लेखनीय है कि आज मालेरकोटला जिला प्रेस क्लब के पत्रकारों की ओर से ज्ञापन दिया जाना था। इस संबंध में जिला प्रशासनिक अमले को पहले से जानकारी थी। खुफिया एजेंसियों की ओर से भी डीसी कार्यालय को पत्रकारों के आज के कार्यक्रम की बाकायदा सूचना पहले ही दी जा चुकी थी। इसके बावजूद कोई भी जिला अधिकारी पत्रकारों का ज्ञापन लेने के लिए मौके पर मौजूद नहीं था। प्रशासन के पत्रकारों के प्रति इस रवैये से नाराज होकर पत्रकारों ने जिला प्रेस क्लब के प्रधान शहाबुद्दीन के नेतृत्व में डीसी कार्यालय के गेट के सामने ही धरना लगा दिया और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए पुलिस प्रशासन की ओर से डीएसपी सतीश कुमार पुलिस बल सहित तुरंत मौके पर पहुंचे।

स्थिति गंभीर होती देख एसडीएम मालेरकोटला मैडम कनू भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने कहा कि आज वह ड्यूटी मजिस्ट्रेट हैं और पत्रकार उन्हें अपना ज्ञापन दे सकते हैं। एसडीएम मैडम कनू ने भरोसा दिलाया कि डीसी साहब के माध्यम से उनका ज्ञापन माननीय राष्ट्रपति जी को भेज दिया जाएगा। इसके बाद पत्रकारों ने आपसी विचार-विमर्श के उपरांत एसडीएम मैडम कनू को अपना ज्ञापन सौंप दिया। इस अवसर पर बोलते हुए मालेरकोटला जिला प्रेस क्लब के प्रधान शहाबुद्दीन ने कहा कि दिल्ली में पुलिस द्वारा दो महिला पत्रकारों के साथ कथित रूप से की गई बेरहमी से मारपीट की घटना ने देशभर के पत्रकार समुदाय में भारी रोष पैदा कर दिया है। इस दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतंत्र विरोधी घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकारिता को सच्चा और निष्पक्ष रखने वाले पत्रकारों के साथ ऐसा दबंगई भरा रवैया बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि जब देश की राजधानी में महिला पत्रकारों से उनका नाम पूछकर उनके साथ मारपीट की जाती है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। दिल्ली पुलिस की इस कथित कार्रवाई की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि जिला प्रेस क्लब मालेरकोटला पीड़ित पत्रकारों के साथ चट्टान की तरह खड़ा है। प्रशासन के पत्रकारों के प्रति आज के कथित रवैये की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए जिला प्रधान शहाबुद्दीन ने कहा कि मालेरकोटला का पत्रकार समुदाय पुलिस एवं सिविल प्रशासन को हमेशा पूरा सहयोग देता आया है, लेकिन प्रशासनिक अमला पत्रकारों को कोई महत्व नहीं देता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पत्रकारों की तलवार रूपी कलम सरकारी कार्यालयों में आम लोगों के साथ हो रहे व्यवहार के बारे में खुलकर लिखने लगेगी तो प्रशासनिक अमले के लिए जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। जिला प्रधान शहाबुद्दीन ने समूचे पत्रकार समुदाय से अपील की कि अपने मान-सम्मान की बहाली के लिए अपनी कलम को जनहित की आवाज बनाकर हक और सच की रक्षा के लिए चलाया जाए।

सीनियर पत्रकार एवं पार्षद मुंशी फारूक ने अपने तीखे संबोधन के दौरान देशभर में पत्रकारों पर हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने मालेरकोटला प्रशासन के पत्रकारों के प्रति आज के रवैये को पत्रकार समुदाय का भारी अपमान बताया। मुंशी फारूक ने जिले के सरकारी कार्यालयों, विशेषकर स्थानीय तहसील कार्यालय में लोगों को कथित रूप से हो रही परेशानी और लूट-खसोट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि तहसीलदार कार्यालय में खासकर रजिस्ट्रियां करवाने को लेकर कथित रूप से चल रहा लेन-देन का धंधा किसी से छिपा नहीं है।

मुंशी फारूक ने तहसील कार्यालय सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में लोगों के साथ हो रही कथित लूट को अपनी कलम की ताकत से उजागर करने का दावा करते हुए अन्य पत्रकार साथियों से भी अपील की कि वे अपनी कलम खुलकर हक और सच के लिए चलाएं तथा लोगों की आवाज बनें। इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अहमदगढ़ प्रेस क्लब के प्रधान सुखजी सिंह खेड़ा, मालेरकोटला के पत्रकार मामून राशिद और असलम नाज ने कहा कि प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन मौजूदा समय में पत्रकारों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि सच दिखाने वाले पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं तो आम जनता के अधिकारों की रक्षा कौन करेगा?

पत्रकार सुखजीत खेड़ा और मामून राशिद ने कहा कि यह मामला केवल दो महिला पत्रकारों का नहीं, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला करने का प्रयास है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दिल्ली पुलिस के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ तुरंत मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई नहीं की गई तो यह रोष प्रदर्शन और व्यापक रूप धारण करेगा।