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उत्तर प्रदेश: पराली प्रबंधन के लिए जागरूकता रथ रवाना, किसानों को बताए जाएंगे नुकसान और बचाव के तरीके

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad Ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Yashoda, Date: 31/10/2026 03:36:01 pm Share:
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  • Published by.: Irshad Ahmad ,
  • Edited By.: Yashoda,
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  • 31/10/2026 03:36:01 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बस्ती खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि विभाग ने अभियान शुरू किया है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बस्ती खेतों में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए कृषि विभाग ने अभियान शुरू किया है। शुक्रवार को कृषि विज्ञान केंद्र, बंजरिया से फसल अवशेष प्रबंधन जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रथ जिले की न्याय पंचायतों और ग्राम पंचायतों में पहुंचकर किसानों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान और उसके उचित प्रबंधन के तरीकों की जानकारी देगा।

जागरूकता रथ को किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष वरुण पांडेय और संयुक्त कृषि निदेशक, बस्ती मंडल राम बचन राम ने रवाना किया। इस दौरान किसानों को पराली नहीं जलाने और फसल अवशेषों का उपयोग जैविक खाद बनाने सहित अन्य उपयोगी कार्यों में करने के लिए प्रेरित किया गया।

उप कृषि निदेशक अशोक कुमार ने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। इससे मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों, केंचुओं और पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचता है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और खेतों की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। इसका असर अगली फसल की पैदावार पर भी पड़ सकता है। पराली के धुएं से लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

उन्होंने किसानों से पराली जलाने के बजाय फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने की अपील की। उन्होंने बताया कि सुपर सीडर, हैप्पी सीडर और श्रेडर जैसे कृषि यंत्रों की मदद से पराली का प्रबंधन किया जा सकता है। इन यंत्रों पर विभाग की ओर से अनुदान की व्यवस्था भी है। फसल अवशेषों को खेत में सड़ाकर जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करने से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कृषि विभाग के अनुसार, पराली जलाने की घटनाओं पर सैटेलाइट के माध्यम से निगरानी की जा रही है। पराली जलाने की पुष्टि होने पर संबंधित किसान के खिलाफ नियमानुसार जुर्माना लगाने और प्राथमिकी दर्ज कराने जैसी कार्रवाई की जा सकती है। विभाग ने किसानों से कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेकर पराली प्रबंधन के वैकल्पिक तरीकों को अपनाने की अपील की।

रथ रवाना किए जाने के अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक, प्रगतिशील किसान और विभागीय कर्मचारी मौजूद रहे। अभियान के जरिए किसानों को पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने के प्रति जागरूक किया जाएगा।

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