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उत्तर प्रदेश: गंगा एक्सप्रेस-वे का हुआ उद्घाटन, यूपी में विकास को मिली नई रफ्तार
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल तेजी से बिछा है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्षों में हाईवे और एक्सप्रेस-वे का जाल तेजी से बिछा है। नोएडा और आगरा के बीच बने एक्सप्रेस-वे के बाद से राज्य में अब तक पांच एक्सप्रेस-वे अस्तित्व में आ चुके हैं। 29 अप्रैल यानी आज बुधवार को उत्तर प्रदेश में छठवें एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बुधवार को उत्तर प्रदेश के नए- नवेले गंगा एक्सप्रेस-वे का उद्घाटन करेंगे। 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे को उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए सत्ता के रास्ते के तौर पर भी देखा जा रहा है। गंगा एक्सप्रेस-वे की नींव योगी सरकार के कार्यकाल में 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से रखी गई थी। गंगा एक्सप्रेस-वे का विचार पहली बार 2007 में तत्कालीन मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती की तरफ से प्रस्तावित किया गया था। उसे समय किसी कारण वश मंजूरी नहीं मिल पाई और यह परियोजना ठंडे बस्ते में डाल दी गई। अगले करीब 12 साल तक इस प्रोजेक्ट पर कोई चर्चा तक नहीं हुई। इस बीच राज्य में अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली समाजवादी पार्टी सरकार ने नोएडा -आगरा एक्सप्रेस-वे को तैयार करने पर ध्यान केंद्रित किया. 29 जनवरी 2019 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस परियोजना को पुनर्जीवित किया। पर्यावरण के मानकों को पूरा करने के लिए, नए एक्सप्रेस-वे को गंगा नदी से 10 किलोमीटर की दूरी पर लगभग समानांतर बनाने की योजना तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण को दी गई। साल 2020 में चरण-1 (मेरठ से प्रयागराज) के निर्माण के लिए 2000 करोड़ रुपए का पहला बजट आवंटित किया गया। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण का काम भी शुरू हो गया। अगस्त 2021 तक 90 प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहण पूरा हो गया। नवंबर 2021 में इस परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी मिल गई और उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने इसके लिए 36230 करोड़ का बजट स्वीकृत किया। 18 दिसंबर 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शाहजहांपुर में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी. एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य अप्रैल 2022 में शुरू हुआ। इस प्रोजेक्ट को डिजाइन- बिल्ड- फाइनेंस- ऑपरेट- ट्रांसफर मॉडल पर 12 पैकेजों में बांटा गया, जिसका ठेका अदाणी एंटरप्राइजेज और आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर नाम की कंपनियों को दिया गया। जनवरी 2025 में एक्सप्रेस-वे के दूसरे चरण को भी मंजूरी दे दी गई, जिसके तहत मेरठ से हरिद्वार (अपर गंगा कैनाल एक्सप्रेस-वे) और प्रयागराज से बलिया तक इसका विस्तार किया जाना है। मार्च 2026 तक पहले चरण में 594 किमी लंबे मुख्य एक्सप्रेस-वे का लगभग 96 प्रतिशत काम पूरा हो गया। अप्रैल आते-आते तक और भी काम पूरे हो गए.अब यह 6 लेन एक्सप्रेस-वे पूरी तरह तैयार है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल 2026 यानी आज बुधवार को हरदोई के सलेमपुर में इसका भव्य उद्घाटन करेंगे. इंजीनियरों के मुताबिक, यह एक्सप्रेस-वे भविष्य की जरूरतों को देखते हुए आठ लेन तक विस्तार करने लायक बनाया गया है। गंगा एक्सप्रेस-वे भारत के सबसे लंबे और आधुनिक एक्सप्रेस-वे में से एक है। यह शाहजहांपुर के जलालाबाद में एक्सप्रेस-वे पर 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन हवाई पट्टी बनाई गई है। यह देश की पहली ऐसी हवाई पट्टी है जहां भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमान दिन और रात दोनों समय सुरक्षित लैंडिंग और टेकऑफ कर सकते हैं। लगभग 36320 करोड़ रुपए की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे में 14 लंबे पुल, जिसमें हापुड़ में गंगा नदी पर 900 मीटर और बदायूं में रामगंगा पर 720 मीट र लंबा पुल शामिल है। इसके अलावा सात रेलवे ओवरब्रिज, 32 फ्लाईओवर और 453 अंडरपास शामिल है। इस एक्सप्रेसवे पर वाहन चालकों की नींद और थकान दूर करने के लिए किनारे पर रंबल स्ट्रिप्स लगाई गई है, जो कंपन पैदा कर चालकों को सचेत करेंगी और हादसों का खतरा कम करेंगी। वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। दुर्घटनाओं को रोकने के लिए इस एक्सप्रेस-वे पर दोपहिया वाहनों का प्रवेश पूरी तरह से वर्जित किया गया है। रास्ते में यात्रियों के लिए विश्राम स्थल, भोजनालय, पेट्रोल पंप और आपात स्थिति के लिए ट्रामा सेंटर जैसी सार्वजनिक सुविधाएं मौजूद हैं। दावा किया जा रहा है कि इस एक्सप्रेस-वे को शुरू होने से देश के कुल एक्सप्रेस-वे नेटवर्क में उत्तर प्रदेश के हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से बढ़कर करीब 60 प्रतिशत हो जाएगी। गंगा एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने वाला है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है। यह परियोजना राज्य के 12 जिलों और लगभग 518 से 519 गांवों को सीधे तौर पर जोड़ती है। इससे न केवल शहरी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बहुत तेजी से बढ़ेंगी। इसके अलावा नए वित्तीय वर्ष (2026- 27) मे शुरू होने जा रहे टोल संचालन से सरकार के राजस्व में भी बड़ी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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