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उत्तर प्रदेश: सुबह 7 बजे कटी सरयू नहर, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा; सूचना के बावजूद जेई पर फोन न उठाने का आरोप

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उत्तर प्रदेश  Published by: Irshad Ahmad , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 10/07/2026 03:35:25 pm Share:
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  • 10/07/2026 03:35:25 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: धान रोपाई के सीजन में शनिवार सुबह करीब 7:00 बजे विकासखंड सेमरियावां के चोरहा-उसराशहीद बॉर्डर पर सरयू नहर की खलीलाबाद शाखा कट गई। नहर कटते ही तेजी से पानी खेतों की ओर बढ़ने लगा

विस्तार

उत्तर प्रदेश: धान रोपाई के सीजन में शनिवार सुबह करीब 7:00 बजे विकासखंड सेमरियावां के चोरहा-उसराशहीद बॉर्डर पर सरयू नहर की खलीलाबाद शाखा कट गई। नहर कटते ही तेजी से पानी खेतों की ओर बढ़ने लगा, जिससे किसानों में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तत्काल अपने स्तर पर कटान रोकने का प्रयास शुरू कर दिया, जिससे बड़े नुकसान को काफी हद तक टाला जा सका। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की जानकारी तुरंत सिंचाई विभाग के जेई सोनू चौरसिया को दी गई। उन्हें कई बार फोन भी किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसके बाद मामले की सूचना एसडीएम खलीलाबाद सदर को दी गई। एसडीएम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर भेजने के निर्देश दिए। एसडीएम के हस्तक्षेप के बाद एसडीओ प्रदीप कुमार मौर्य और जेई आनंद कुमार जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंचे और कटान स्थल को बांधने का कार्य शुरू कराया। तब तक ग्रामीण लगातार कटान रोकने में जुटे रहे।

ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। वर्ष 2024 में भी इसी क्षेत्र में नहर कटने से किसानों की बड़ी फसल जलमग्न हो गई थी। उस समय विभाग ने स्थायी मरम्मत और नियमित निरीक्षण का भरोसा दिया था, लेकिन आज तक नहर की जर्जर स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर केवल खानापूरी होती है, जिसके चलते हर साल किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है। ग्रामीणों की प्रतिक्रिया मोहम्मद सऊद ने कहा, "सुबह से ही विभाग को सूचना दी गई, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी फोन तक नहीं उठा रहे थे। अगर ग्रामीण खुद आगे नहीं आते तो नुकसान कहीं अधिक होता।"

वाजेफा ने कहा, "हर साल यही स्थिति बनती है। नहर की स्थायी मरम्मत नहीं होने से किसानों की मेहनत पर पानी फिर जाता है। अब जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। जुबेर अहमद ने कहा, "धान रोपाई का समय है। नहर कटने से किसानों की तैयारियां प्रभावित हुई हैं। विभाग को केवल अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि पूरे तटबंध की मजबूती पर काम करना चाहिए। एसडीओ का पक्ष इस संबंध में एसडीओ प्रदीप कुमार मौर्य ने बताया कि प्रथम दृष्टया नहर कटने का कारण शाही (साही) जानवर द्वारा तटबंध में बनाए गए बिल प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि साही के बिलों के कारण तटबंध के भीतर से धीरे-धीरे पानी का रिसाव शुरू हो जाता है, जिससे समय के साथ कटान हो जाता है। उन्होंने बताया कि सूचना मिलते ही विभाग की टीम जेसीबी मशीन के साथ मौके पर पहुंची और कटान को तत्काल बंद करा दिया गया। साथ ही पूरे तटबंध का निरीक्षण कराया जा रहा है तथा जहां भी रिसाव या कमजोरी मिलेगी, वहां आवश्यक मरम्मत कराई जाएगी। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, नहर की स्थायी मरम्मत सुनिश्चित करने तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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