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उत्तर प्रदेश: गरीबों और बच्चों की सेवा को समर्पित है सिद्धार्थ राय का जीवन, समाजसेवा से बने युवाओं के प्रेरणास्रोत

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उत्तर प्रदेश  Published by: ARVIND KUMAR VISHWAKARMA , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 06/08/2026 04:19:32 pm Share:
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  • Published by.: ARVIND KUMAR VISHWAKARMA ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
  • Date:
  • 06/08/2026 04:19:32 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर के इस युवा समाजसेवी ने सफलता की परिभाषा बदली, 5 वषों से जरूरतमंदों के 15 के बीच सक्रिय सेवा का सिलसिला जारी उच्च शिक्षा और कॉपॉटर करियर से सेवा की राह तक सिद्धार्थ राय ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और कोपर्याग्द क्षेत्र में कार्य करने का अवसर भी मिला

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर के इस युवा समाजसेवी ने सफलता की परिभाषा बदली, 5 वषों से जरूरतमंदों के 15 के बीच सक्रिय सेवा का सिलसिला जारी उच्च शिक्षा और कॉपॉटर करियर से सेवा की राह तक सिद्धार्थ राय ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और कोपर्याग्द क्षेत्र में कार्य करने का अवसर भी मिला। लेकिन समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्ग के प्रति उनका झुकाव लगातार गहरा होता गया। उत्तराय रिपोर्ट के अनुसार, वे करीब 15 वर्षों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय हैं। करियर और व्यतिमात सफलता के अवसरों के बावजूद उन्होंने सामाजिक सरोकारों को अपनी जीवन में महत्वपूर्ण स्थान दिया। यहीं वजह है कि उनकी सेका यात्रा आज अनेक लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बनी हुई है। बच्चों की मुस्कान को मानते हैं सबसे बड़ा सम्मान सिद्धार्थ राय की सेवा यात्रा का एक महत्वपूर्ण पक्ष बच्चों के प्रति उनकी संवेदनशीलता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा और जरूरतों में सहयोग करना उ

नके सामाजिक कार्यों का प्रमुख हिस्सा रहा है। किसी बच्चे के हाथ में किताब पहुंचाना, उसकी पढ़ाई में मदद करना अथवा उसके चेहरे पर मुस्कान लाना हर प्रयास वे छोटे सिद्धार्थ की बाते केवल किसी बच्चे के भविष्य की दिशा बदल सकते हैं। सम्मान मिले, लेकिन सेवा का रूकना नहीं बदला सामाजिक क्षेत्र में सक्रियता के लिए सिद्धार्थ राय को विभिन्त स्तरों पर सम्मान भी प्राप्त हुए है। उन्हें भारत सरकार का राष्ट्रीय युवा पुरस्कार मिल चुका है। वर्ष 2024 में उनका चयन उतार प्रदेश सरकार के विवेकानंद पुवा अवार्ड के लिए भी हुआ। इसके अलावा जम्मू-करशीर के उपराज्यपाल मनोज सिद्धा द्वारा भी उन्हें सामाजिक कायों के लिए सम्मानित किए जाने की खबर सामने आई हौ। हालांकि किसी समाजसेवी की वास्ततिक उपलधि केवल पुसकारों और सम्मान-माओं से तय नहीं होती। असली सम्मान उन लोगों की आंखों में दिखाई देता है, जिनके जीवन में किसी के प्रयास से उम्मीद की किरण पैदा होती है।


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