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उत्तर प्रदेश: मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को सुरक्षा और अधिकारों के प्रति किया जागरूक
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: महिलाओं और बेटियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ ही किसी भी तरह के उत्पीड़न या परेशानी की स्थिति में चुप नहीं रहना चाहिए। समय रहते पुलिस और संबंधित विभागों से सहायता लेकर समस्याओं का समाधान कराया जा सकता है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: महिलाओं और बेटियों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ ही किसी भी तरह के उत्पीड़न या परेशानी की स्थिति में चुप नहीं रहना चाहिए। समय रहते पुलिस और संबंधित विभागों से सहायता लेकर समस्याओं का समाधान कराया जा सकता है। मिशन शक्ति अभियान के तहत बुधवार को सेमरियावां ब्लॉक सभागार में बहू-बेटी जागरूकता सम्मेलन आयोजित कर महिलाओं को सुरक्षा, अधिकारों, साइबर अपराध से बचाव और सरकारी सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई। वहीं सागभर में ग्राम पंचायत स्तर के सुगमकर्ताओं की बैठक कर महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। ब्लॉक सभागार में आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, आशा कार्यकर्ताओं और समूह सखियों को महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा, साइबर अपराध से बचाव तथा विभिन्न सरकारी सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई। थाना दुधारा के एसआई राजेश कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी महिला को हिंसा, उत्पीड़न या अन्य परेशानी को चुपचाप सहने के बजाय अपनी बात सामने रखनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर तत्काल पुलिस अथवा संबंधित विभाग से सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने साइबर अपराध से बचाव के लिए अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने और ओटीपी, बैंक खाता व अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी। ऑनलाइन धमकी, साइबर उत्पीड़न और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो के दुरुपयोग की स्थिति में तत्काल शिकायत दर्ज कराने के बारे में भी जानकारी दी। बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर भी जोर नेशनल इंटर कॉलेज मुड़ाडीहाबेग के प्रधानाचार्य मुजीबुल्लाह ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा के साथ उनकी शिक्षा और आत्मनिर्भरता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। जागरूकता से ही महिलाएं अपने अधिकारों को समझकर समस्याओं का मजबूती से सामना कर सकती हैं। उन्होंने महिलाओं से किसी भी परेशानी को परिवार, सगे-संबंधियों अथवा संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचाने की अपील की। कार्यक्रम में महिला कांस्टेबल पल्लवी कश्यप और आरती सिंह ने भी महिलाओं को सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। महिलाओं को दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, मारपीट, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न, आर्थिक हिंसा और पारिवारिक विवाद की स्थिति में उपलब्ध कानूनी एवं सरकारी सहायता सेवाओं के बारे में बताया गया। सागभर में सुगमकर्ताओं को दी जिम्मेदारी उधर, सागभर में आयोजित ग्राम पंचायत स्तर के सुगमकर्ताओं की बैठक में महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने तथा महिला एवं बाल संरक्षण सेवाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने पर जोर दिया गया। एसआई राजेश कुमार सिंह, महिला कांस्टेबल पल्लवी कश्यप और महिला कांस्टेबल आरती सिंह ने सुगमकर्ताओं को महिला सुरक्षा, घरेलू हिंसा की रोकथाम, बाल संरक्षण और साइबर अपराध के प्रति जागरूक किया। अधिकारियों ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल घटना के बाद पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं है। जागरूकता, रोकथाम और समय पर सहायता भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी भी पीड़िता की बात सम्मानपूर्वक सुनने और उसकी पहचान व मामले से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में बाल विवाह, बाल हिंसा और बाल शोषण जैसे मामलों को गंभीरता से लेने की अपील की गई। बच्चों से संबंधित किसी भी समस्या की जानकारी मिलने पर चुप न रहने और समय रहते संबंधित विभाग को सूचना देने के लिए कहा गया। हेल्पलाइन और सहायता सेवाओं की दी जानकारी कार्यक्रमों में महिलाओं और सुगमकर्ताओं को विभिन्न हेल्पलाइन के बारे में जानकारी दी गई। आपात स्थिति में 112, महिला सहायता के लिए 181 और 1090, साइबर अपराध की शिकायत के लिए 1930 तथा बच्चों से जुड़े मामलों में 1098 पर संपर्क करने के बारे में बताया गया। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर वन स्टॉप सेंटर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और संबंधित विभागों से कानूनी सहायता, परामर्श, सुरक्षा और आश्रय की सुविधा लेने की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और आईजीआरएस पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराने के बारे में बताया गया। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी महिला या बच्चे के साथ होने वाले उत्पीड़न की जानकारी मिलने पर समय रहते पुलिस अथवा संबंधित विभाग को सूचना देकर सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करना चाहिए। पांच सितंबर तक चलेगा प्रशिक्षण कार्यक्रम में दस गांवों की समूह महिलाएं, आशा कार्यकर्ता और समूह सखियां शामिल रहीं। बताया गया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम पांच सितंबर तक चलेगा। इसमें दस-दस गांवों के समूह में महिलाओं और आशा कार्यकर्ताओं को एक दिन का जागरूकता प्रशिक्षण दिया जाएगा। महिलाओं और छात्राओं को सुरक्षा संबंधी जागरूकता सामग्री भी उपलब्ध कराई गई। नौ विकास खंडों में 236 महिलाओं और बालिकाओं ने किया प्रतिभाग मिशन शक्ति अभियान के तहत बुधवार को जिले के नौ विकास खंडों में बहू-बेटी सम्मेलन और महिला सशक्तीकरण चौपाल का भी आयोजन किया गया। इसमें कुल 236 महिलाओं और बालिकाओं ने प्रतिभाग किया। एंटी रोमियो टीम और मिशन शक्ति टीम ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उनके अधिकारों, सुरक्षा उपायों और शासन की कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया। इस दौरान मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, मातृ शक्ति संबल योजना, निराश्रित महिला पेंशन और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना समेत विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई।
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