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उत्तर प्रदेश: डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, 37 योजनाओं और कानून-व्यवस्था की करेंगे समीक्षा
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बुधवार को बरेली पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले सर्किट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बुधवार को बरेली पहुंचे, जहां उन्होंने सबसे पहले सर्किट हाउस में पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की। इसके बाद उनका कलक्ट्रेट सभागार में कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों, राजस्व मामलों और सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करने का कार्यक्रम निर्धारित है। डिप्टी सीएम के दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन और विभिन्न विभागों में सुबह से ही तैयारियां तेज रहीं। समीक्षा बैठक में वर्ष 2017 से अब तक संचालित सरकार की 37 प्रमुख योजनाओं की प्रगति, बजट खर्च और लाभार्थियों का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया जाएगा। अधिकारियों को योजनाओं की वित्तीय और भौतिक प्रगति के अद्यतन आंकड़ों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। कई विभागों ने बैठक से पहले अपनी रिपोर्टों को अंतिम रूप देकर लाभार्थियों और बजट उपयोग से जुड़े आंकड़ों का मिलान किया। बैठक के दौरान उन परियोजनाओं की भी समीक्षा होगी, जो निर्धारित समय सीमा के बावजूद अभी तक पूरी नहीं हो सकी हैं। सूत्रों के अनुसार, लक्ष्य से पीछे चल रहे विभागों से देरी के कारण पूछे जाएंगे और कार्यों में तेजी लाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि विभागों ने आवंटित बजट का कितना उपयोग किया और निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले उनका प्रदर्शन कैसा रहा। डिप्टी सीएम की समीक्षा में आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना सहित कुल 37 महत्वाकांक्षी योजनाओं की प्रगति पर विशेष फोकस रहेगा। इसके अलावा विभागवार विकास परियोजनाओं और लंबित कार्यों की भी समीक्षा की जाएगी। बैठक के एजेंडे में शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा भी शामिल है। जनवरी 2026 से अब तक डिप्टी सीएम कार्यालय में प्राप्त शिकायतों के समाधान की स्थिति पर विभागवार रिपोर्ट मांगी गई है। अधिकारियों को बताना होगा कि कितनी शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया गया और कितने मामले अभी लंबित हैं। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि समीक्षा के दौरान किसी विभाग की प्रगति असंतोषजनक पाई गई या शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही सामने आई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए जा सकते हैं। ऐसे में यह समीक्षा बैठक कई विभागों के लिए जवाबदेही और प्रदर्शन की महत्वपूर्ण परीक्षा मानी जा रही है।
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