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उत्तर प्रदेश: आंगनबाड़ी केंद्रों में सजे नन्हे कान्हा-राधा, जीरो बजट सजावट से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

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उत्तर प्रदेश  Published by: Rakesh Kumar(UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 03/09/2026 04:55:06 pm Share:
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  • Published by.: Rakesh Kumar(UP) ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
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  • 03/09/2026 04:55:06 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बलरामपुर में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के तहत बलरामपुर देहात और बलरामपुर शहर के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बलरामपुर में बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग के तहत बलरामपुर देहात और बलरामपुर शहर के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों पर नन्हे-मुन्ने बच्चे भगवान श्रीकृष्ण और राधा के बाल स्वरूप में नजर आए। नन्हे कान्हा पीले वस्त्र, मोरपंख मुकुट और हाथ में बांसुरी के साथ सजे दिखाई दिए, वहीं नन्हीं राधाओं ने पारंपरिक परिधानों में अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का ध्यान आकर्षित किया। बच्चों ने डांडिया रास, कृष्ण भजन और सामूहिक बालगीतों पर प्रस्तुतियां दीं। कार्यकत्रियों और माताओं ने पुष्प वर्षा कर बच्चों का उत्साह बढ़ाया।

जीरो बजट सजावट रही आकर्षण का केंद्र

इस बार जन्माष्टमी आयोजन की खास बात 'जीरो बजट' सजावट रही। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और माताओं ने आम-अशोक के पत्तों, फूलों, प्राकृतिक रंगों और घरों में अनुपयोगी पड़ी सामग्री का इस्तेमाल कर केंद्रों को सजाया। चावल के आटे और प्राकृतिक रंगों से बनाई गई रंगोली तथा आकर्षक ढंग से सजाई गई मटकियों ने लोगों का ध्यान खींचा। इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और कम खर्च में रचनात्मक सजावट का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बच्चों के अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया। इससे आयोजन में सामुदायिक सहभागिता भी देखने को मिली।

पोषण और स्वास्थ्य के प्रति भी किया जागरूक

जन्माष्टमी कार्यक्रम को केवल सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं रखा गया। इस दौरान माताओं के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए गए, जिसमें बच्चों के नियमित वजन-मापन, संतुलित आहार, व्यक्तिगत स्वच्छता और समय पर टीकाकरण के महत्व की जानकारी दी गई। कार्यक्रम के अंत में बच्चों और अभिभावकों को माखन-मिश्री सहित पौष्टिक प्रसाद वितरित किया गया। जन्माष्टमी का यह आयोजन संस्कृति, रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण, पोषण जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता का सुंदर संगम बनकर सामने आया।