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उत्तर प्रदेश: आंगनवाड़ी केंद्रों में नन्हे-मुन्नों ने मनाई जन्माष्टमी, बाल गोपाल के रूप में दी मनमोहक प्रस्तुतियां

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उत्तर प्रदेश  Published by: Vijay Kumar (UP) , उत्तर प्रदेश  Edited By: Shubhi Shikha Nayal, Date: 03/09/2026 04:44:58 pm Share:
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  • Published by.: Vijay Kumar (UP) ,
  • Edited By.: Shubhi Shikha Nayal,
  • Date:
  • 03/09/2026 04:44:58 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बलरामपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को लेकर जनपद के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों में उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बलरामपुर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व को लेकर जनपद के विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों में उत्साह और भक्ति का माहौल देखने को मिला। जन्माष्टमी से दो दिन पहले से ही आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सहभागिता से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इस दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चे भगवान श्रीकृष्ण और राधा के बाल स्वरूप में सजकर पहुंचे और अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। इसी क्रम में बाल विकास परियोजना देहात के आंगनवाड़ी केंद्र बरांव, ककरा, पीलीभीत, फत्तेजोत और बलुआ समेत अन्य केंद्रों पर भी जन्माष्टमी कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रमों में बच्चों ने अपने अभिभावकों की मौजूदगी में उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। बाल कृष्ण और राधा के रूप में सजे बच्चों की मनमोहक छवि देखकर अभिभावक भी काफी उत्साहित नजर आए और उन्होंने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना की।

कार्यक्रमों के सफल आयोजन में आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यकत्रियों ने बच्चों को कार्यक्रम के लिए तैयार करने के साथ ही उन्हें भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी जानकारी भी दी। आयोजकों के अनुसार, इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन बच्चों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ उनकी रचनात्मकता, प्रतिभा और आत्मविश्वास को बढ़ाने में मदद करते हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों में बाल कृष्ण के रूप में सजे बच्चों की मुस्कान और उत्साह से पूरे परिसर में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा।

इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। जन्माष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना के लिए धरती पर अवतार लिया था। आंगनवाड़ी केंद्रों पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने बच्चों और अभिभावकों को पर्व की खुशी से जोड़ने के साथ ही भारतीय संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत की। कार्यक्रमों के दौरान “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।