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गुजरात: 89 नई एम्बुलेंस होंगी तैनात, 18 मिनट 32 सेकंड के मौजूदा रिस्पांस टाइम को घटाकर करीब 10 मिनट करने का लक्ष्य

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गुजरात:  Published by: Gheesaram Fauji Choudhary , गुजरात:  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 19/09/2026 06:01:31 pm Share:
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  • Published by.: Gheesaram Fauji Choudhary ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 19/09/2026 06:01:31 pm
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संक्षेप

गुजरात: गुजरात के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम घटाने के लिए गुजरात सरकार के जनजातीय विकास विभाग द्वारा विशेष योजना बनाई गई है।  

विस्तार

गुजरात: गुजरात के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा का रिस्पांस टाइम घटाने के लिए गुजरात सरकार के जनजातीय विकास विभाग द्वारा विशेष योजना बनाई गई है।  गुजरात के सुदूर और दुर्गम इलाकों में भी अब 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा केवल दस मिनट में पहुंच सके, इसके लिए विशेष योजना बनाई गई है। जल्द ही जनजातीय क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति के अनुकूल 89 नई एम्बुलेंस इन क्षेत्रों में सेवारत की जाएंगी। यह कार्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाता है  और दूरदराज के दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लाखों आदिवासीबंधुजनों को त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए एक सशक्त व्यवस्था साकार करेगा ।  मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में, गुजरात सरकार ने राज्य के सुदूर जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं।  आपातकालीन एम्बुलेंस नेटवर्क के इस नए विस्तार का मुख्य उद्देश्य यह है कि भौगोलिक बाधाओं के कारण जनजातीय समुदायों के लोगों को समय पर और जीवनरक्षक चिकित्सा सेवा मिलने में विलंब न हो।

नई एम्बुलेंस के इस सेवानेटवर्क में जुड़ने से, आदिवासी बहुल जिलों में  एम्बुलेंस की वर्तमान संख्या 553 से बढ़कर 642 हो जाएगी। आदिवासी बहुल क्षेत्रों में 108 एम्बुलेंस सेवा का औसतन रिस्पांस टाइम कम करने का  प्रयास समूचे गुजरात में 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा का औसतन रिस्पांस टाइम लगभग 13 मिनट 9 सेकंड है। शहरी क्षेत्रों में यह अवधि  लगभग 9 मिनट 55 सेकंड है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 16 मिनट 28 सेकंड है।  आदिवासी बहुल सुदूर क्षेत्रों में जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के कारण  इमरजेंसी रिस्पांस टाइम लगभग 18 मिनट 32 सेकंड है। गुजरात सरकार का उद्देश्य नई एम्बुलेंस जोड़कर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इमरजेंसी रिस्पांस टाइम को घटा कर राज्य के औसतन रिस्पांस टाइम के स्तर पर लाना है।

नई एम्बुलेंसों के साथ, राज्य का उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में औसतन इमरजेंसी रिस्पांस टाइम को मौजूदा 18 मिनट 32 सेकंड से घटाकर लगभग 10 मिनट तक लाना है। 
इस पहल से जरूतमंद मरीजों को अस्पताल पहुंचाने की गति में भी सुधार होने की उम्मीद है। रिस्पांस टाइम में अपेक्षित यह कमी आदिवासी बहुल और गैर आदिवासी क्षेत्रों के बीच के मौजूदा अंतर को पाटने में भी मदद करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण स्थानों पर मरीजों को जल्द से जल्द आपातकालीन सहायता मिले। आदिवासी बहुल क्षेत्रों के लिए 89 नई एम्बुलेंस नई एम्बुलेंस की व्यवस्था आदिवासीबहुल  क्षेत्रों की विभिन्न आपातकालीन सेवा हेतु आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर की जा रही है। इन आवश्यकताओं में शामिल हैं-

गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए 22 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस।आपातकालीन परिवहन और जीवनरक्षक आवश्यकताओं के लिए 55 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एम्बुलेंस। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, कच्चे रास्तों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई 12 फोर-व्हील-ड्राइव (4WD) एम्बुलेंस।
मुख्यतः  भारी बारिश के समय ये 12 विशेष 4WD एम्बुलेंस बेहद उपयोगी साबित होंगी। अतिवर्षा  और बाढ़ जैसे हालात में  सामान्य एम्बुलेंस को मरीजों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है, लेकिन ये नई एम्बुलेंस इन बाधाओं को पार करने में सक्षम हैं और समय पर मरीजों तक पहुंचेंगी।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि आपातकालीन सेवा के तेजी से पहुंचने से मरीजों को 'गोल्डन आवर' में महत्वपूर्ण इलाज मिलने की संभावना में सुधार होगा। यह पहल आपातकालीन परिवहन के दोनों महत्वपूर्ण चरणों—मरीज तक तेजी से पहुंचना और मरीज को तेजी से अस्पताल पहुंचाना —पर ध्यान केंद्रित करती है। नई 89 आपातकालीन एम्बुलेंस खरीदने की प्रक्रिया जारी है और जल्द ही इन्हें तैनात  कर दिया जाएगा।

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