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उत्तर प्रदेश: स्नेक बाइट अवेयरनेस डे पर डॉक्टरों ने बताए बचाव के उपाय, ‘RIGHT’ फॉर्मूले से प्राथमिक सावधानियों की दी जानकारी
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: नेशनल स्नेक बाइट अवेयरनेस डे पर मीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डॉक्टरों ने लोगों को सांप के काटने से बचाव और प्राथमिक उपचार के बारे में जागरूक किया। डॉ
विस्तार
उत्तर प्रदेश: नेशनल स्नेक बाइट अवेयरनेस डे पर मीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डॉक्टरों ने लोगों को सांप के काटने से बचाव और प्राथमिक उपचार के बारे में जागरूक किया। डॉक्टरों ने कहा कि सांप के काटने पर झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र या घरेलू इलाज में समय बर्बाद न करें। मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। समय पर इलाज मिलने से गंभीर स्थिति और मौत को रोका जा सकता है डॉ. रोहन दिवाकर ने बताया कि सांप के काटने पर 'RIGHT' फॉर्मूला अपनाना चाहिए। इसमें R का मतलब है 'Reassure' यानी मरीज को शांत रखना और घबराने से रोकना। I का मतलब 'Immobilize' यानी प्रभावित हाथ या पैर को स्थिर रखना। G का मतलब 'Get to Hospital' यानी बिना देर किए मरीज को अस्पताल पहुंचाना। H का मतलब 'Hell with Remedies' यानी झाड़-फूंक और घरेलू नुस्खों से बचना। T का मतलब 'Tell Symptoms' यानी डॉक्टर को सांप के काटने का समय और मरीज के लक्षणों की पूरी जानकारी देना डॉक्टरों ने यह भी बताया कि सांप के काटने के बाद प्रभावित अंग को स्थिर रखना चाहिए। अंगूठी, घड़ी या कोई भी तंग चीज तुरंत हटा दें। घाव पर चीरा न लगाएं, जहर चूसने की कोशिश न करें। कसकर पट्टी न बांधें और न ही बर्फ या किसी केमिकल का इस्तेमाल करें। मरीज को डॉक्टर की सलाह के बिना चाय, कॉफी या एस्पिरिन जैसी दवाएं भी नहीं देनी चाहिए अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर जरूरी जांच के बाद मरीज की हालत देखकर एंटी-स्नेक वेनम (ASV) देने का फैसला करते हैं। अगर सांस लेने में दिक्कत, पेशाब बंद होना या बहुत ज्यादा सूजन जैसे गंभीर लक्षण दिखें, तो मरीज को तुरंत बड़े अस्पताल रेफर किया जाता है। डॉक्टरों ने गांव वालों से अपील की कि सांप के काटने पर अंधविश्वास से बचें और समय पर इलाज कराएं।
