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मध्य प्रदेश: श्रीमद्भागवत कथा का चौथा दिन, भक्ति, ज्ञान और सामाजिक संदेश से गूंजा पंडाल

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 06/05/2026 06:00:23 pm Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
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  • 06/05/2026 06:00:23 pm
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: पोरसा क्षेत्र के ग्राम कोथर कला स्थित पूठा वाली माता मंदिर में आयोजित इस भव्य कथा में आज भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा का आयोजन देवेंद्र सिंह तोमर द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें पूरे क्षेत्र से भक्तजन पहुंचकर धर्म लाभ ले रहे हैं।

विस्तार

मध्य प्रदेश: पोरसा क्षेत्र के ग्राम कोथर कला स्थित पूठा वाली माता मंदिर में आयोजित इस भव्य कथा में आज भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा का आयोजन देवेंद्र सिंह तोमर द्वारा कराया जा रहा है, जिसमें पूरे क्षेत्र से भक्तजन पहुंचकर धर्म लाभ ले रहे हैं। कथा में क्या रहा खास?चौथे दिन की कथा में डॉ. शास्त्री ने अत्यंत भावपूर्ण और विस्तारपूर्ण शैली में कई प्रमुख प्रसंगों का वर्णन किया: समुद्र मंथन और उसमें निकले अमृत की कथा, राजा बली और वामन अवतार का चरित्र। भगवान श्रीराम का जन्म अधर्म के विनाश हेतु अवतार, लंकापति रावण को मारने के लिए अवतार लिया और धरती पर मर्यादा काइम की भगवान श्रीकृष्ण जन्म की दिव्य कथा उनके ओजस्वी प्रवचन से पूरा पंडाल “जय श्रीराम” और “हरे कृष्ण” के जयघोष से गूंज उठा। धर्म के साथ दिया सामाजिक संदेश कथा के अंत में उन्होंने श्रद्धालुओं को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करते हुए कहा। 

वृक्ष ही जीवन का आधार हैं, हरियाली से ऑक्सीजन, और ऑक्सीजन से जीवन संभव है कथा का मुख्य संदेश डॉ. शास्त्री ने अपने प्रवचन में स्पष्ट रूप से कहा, भगवान की भक्ति जीवन को सरल और सुखमय बनाती है। माता-पिता की सेवा सबसे बड़ा धर्म है, समाज में प्रेम, भाईचारा और मानवता बनाए रखना अनिवार्य है। ग्रामीणों का सराहनीय सहयोग इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में नाथू सिंह तोमर, राजेश सिंह, रामवीर सिंह, बृजपाल सिंह, जितेंद्र सिंह, अशोक सिंह, इंद्रपाल सिंह, श्यामवीर सिंह, लोकेंद्र सिंह, इन्द्रपाल सिंह तोमर सहित समस्त ग्रामीणों और भक्तों का विशेष योगदान रहा। पोरसा में आयोजित यह श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में संस्कार, सेवा, पर्यावरण संरक्षण और आपसी सद्भाव का मजबूत संदेश देने का माध्यम बन रही है। सच्चे संत का मार्गदर्शन और श्रद्धा से कथा श्रवण, जीवन की दिशा बदल सकता है।