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उत्तर प्रदेश: CBSE मानकों की अनदेखी के आरोप, आरएस पब्लिक स्कूल में नियम उल्लंघन को लेकर उठे सवाल
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संक्षेप
उत्तर प्रदेश: महराजगंज जनपद के खुटहा बाजार स्थित आरएस पब्लिक स्कूल एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: महराजगंज जनपद के खुटहा बाजार स्थित आरएस पब्लिक स्कूल एक बार फिर सवालों के घेरे में है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) के मानकों की अनदेखी को लेकर स्कूल प्रबंधन पर गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, विद्यालय में एक-एक कक्षा में 60 से अधिक विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है, जो CBSE के निर्धारित मानकों के बिल्कुल विपरीत है। CBSE के दिशा-निर्देशों के अनुसार, एक सेक्शन में अधिकतम 40 छात्रों की ही अनुमति होती है ताकि प्रत्येक विद्यार्थी पर पर्याप्त ध्यान दिया जा सके और शिक्षा की गुणवत्ता बनी रहे। लेकिन आरएस पब्लिक स्कूल में इस नियम की अनदेखी कर अत्यधिक संख्या में छात्रों को एक ही कक्षा में समायोजित किया जा रहा है। सूत्रों का यह भी कहना है कि केवल छात्र संख्या ही नहीं, बल्कि कई अन्य बुनियादी नियमों की भी अनदेखी की जा रही है। जानकारी के अनुसार कक्षाओं का आकार भी मानक के अनुरूप नहीं है, जिससे बच्चों को बैठने में दिक्कत होती है। पर्याप्त वेंटिलेशन और रोशनी की व्यवस्था भी सवालों के घेरे में बताई जा रही है। इसके अलावा, CBSE के नियमों के अनुसार स्कूल में लाइब्रेरी, साइंस लैब, कंप्यूटर लैब, खेल का मैदान, स्वच्छ पेयजल और अलग-अलग शौचालय की अनिवार्य व्यवस्था होनी चाहिए। लेकिन सूत्रों के अनुसार इन व्यवस्थाओं में भी कमी बताई जा रही है या फिर वे मानकों के अनुरूप नहीं है! शिक्षकों की संख्या और उनकी योग्यता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। CBSE के तहत योग्य शिक्षकों (B.Ed, TET आदि) की नियुक्ति अनिवार्य होती है और छात्र-शिक्षक अनुपात भी तय होता है, लेकिन यहां इन नियमों का पालन पूरी तरह से नहीं किया जा रहा, ऐसा आरोप है। इतना ही नहीं, सुरक्षा मानकों जैसे फायर सेफ्टी, सीसीटीवी निगरानी और आपातकालीन व्यवस्थाओं को लेकर भी स्थिति संतोषजनक नहीं बताई जा रही। इससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। सूत्रों के अनुसार, यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई गंभीर खामियां सामने आ सकती हैं। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है और जिम्मेदार अधिकारियों से जांच कर कार्रवाई की मांग उठ रही है। फिलहाल, इस पूरे मामले में स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब देखना होगा कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या कार्रवाई होती है।
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