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उत्तर प्रदेश: वैशाख पूर्णिमा पर विश्वभर में श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा पवित्र पर्व, शांति और अहिंसा का दिया संदेश

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उत्तर प्रदेश  Published by: Anand Kumar , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal, Date: 30/04/2026 11:41:52 am Share:
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  • Published by.: Anand Kumar ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 30/04/2026 11:41:52 am
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: बुद्ध पूर्णिमा का पर्व पूरी दुनिया में भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण की स्मृति में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है।

विस्तार

उत्तर प्रदेश: बुद्ध पूर्णिमा का पर्व पूरी दुनिया में भगवान गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बोधि) और महापरिनिर्वाण की स्मृति में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। यह दिन बौद्ध और हिंदू दोनों ही परंपराओं में अत्यंत पवित्र माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि बुद्ध का जीवन इसी वैशाख पूर्णिमा के दिन इन तीन महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा हुआ है। इस अवसर पर लाखों-करोड़ों श्रद्धालु उनके बताए गए शांति, करुणा और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष बुद्ध पूर्णिमा की तिथि 30 अप्रैल की रात 9:12 बजे से शुरू होकर 1 मई की रात 10:52 बजे तक रहेगी। वहीं चंद्रोदय शाम 6:52 बजे होने के कारण मुख्य पर्व 1 मई, शुक्रवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के नौवें अवतार के रूप में भी गौतम बुद्ध को स्वीकार किया जाता है। 


इस दिन देश-विदेश के बौद्ध मंदिरों और हिंदू धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना, ध्यान और सामूहिक प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है। विशेष रूप से बोधगया और सारनाथ जैसे पवित्र स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन बोधिवृक्ष (पीपल वृक्ष) की पूजा का विशेष महत्व होता है, क्योंकि इसी वृक्ष के नीचे बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। लोग इस दिन वृक्ष को जल, दूध और इत्र मिश्रित जल अर्पित करते हैं तथा दीप जलाकर अपने जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। इस पर्व की सबसे महत्वपूर्ण भावना अहिंसा, करुणा और सद्भाव है। बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता, शांति और आपसी एकता का संदेश देने वाला पावन पर्व है।