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उत्तर प्रदेश: जल जीवन मिशन बैठक में हंगामा: 70% आबादी प्यास से बेहाल, अधूरी पाइपलाइन पर भड़के प्रधान
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: ब्लाक मुख्यालय विजयपुर के सभा कक्ष में मंगलवार को आयोजित जल जीवन मिशन की बैठक हंगामेदार रही। क्षेत्र में व्याप्त पेयजल संकट और निर्माण कार्यों की बदहाल स्थिति को लेकर ग्राम प्रधानों ने जोरदार विरोध जताया। प्रधानों का कहना था कि गर्मी की शुरुआत होते ही करीब 70 प्रतिशत आबादी पानी के लिए परेशान हो गई है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: ब्लाक मुख्यालय विजयपुर के सभा कक्ष में मंगलवार को आयोजित जल जीवन मिशन की बैठक हंगामेदार रही। क्षेत्र में व्याप्त पेयजल संकट और निर्माण कार्यों की बदहाल स्थिति को लेकर ग्राम प्रधानों ने जोरदार विरोध जताया। प्रधानों का कहना था कि गर्मी की शुरुआत होते ही करीब 70 प्रतिशत आबादी पानी के लिए परेशान हो गई है। जल आकलन समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत न करने पर परियोजना प्रबंधक हरिओम मिश्रा को प्रधानों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। कुशहां की प्रधान पूजा देवी ने बताया कि दलित बस्ती में पिछले 20 दिनों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है। इसी बीच नदिनी गांव के आपरेटर द्वारा प्रधानों पर लापरवाही का आरोप लगाने से माहौल और गरमा गया। प्रधानों ने पलटवार करते हुए कहा कि आधार कार्ड जमा कराने के बाद भी आपरेटर गांवों में नहीं आते। मनिकठी के प्रधान कमलेश बिंद ने कहा कि पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन अब तक नल नहीं लगाए गए हैं। प्रधान संघ के उपाध्यक्ष विनोद यादव और महामंत्री शिव लखन बिंद ने कहा कि “हर घर नल योजना” के तहत लगाए गए नल केवल दिखावा बनकर रह गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीडीओ ने पहाड़ी क्षेत्रों में युद्धस्तर पर जलापूर्ति बहाल करने के निर्देश दिए। साथ ही प्रभारी एडीओ पंचायत बृजेश सिंह को अपने कार्यालय में आपातकालीन कंट्रोल रूम स्थापित कर निगरानी करने के निर्देश दिए।
बैठक में बीडीओ रामपाल ने बताया कि छानबे ब्लाक के 255 राजस्व गांवों में 42 ओवरहेड टैंकों के माध्यम से जलापूर्ति की जा रही है। हालांकि, प्रधानों ने इस दावे को नकारते हुए कहा कि जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब हैं। प्रधान संघ के अध्यक्ष संतोष तिवारी ने सुझाव दिया कि दस-दस गांवों का क्लस्टर बनाकर 48 घंटे के भीतर हर घर तक जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। वहीं विजयपुर की प्रधान शहीदा बानों ने आरोप लगाया कि इंटरलॉकिंग और सीसी रोड तोड़ दिए गए, लेकिन भूमिगत पाइपलाइन का काम अब तक अधूरा पड़ा है।
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