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Rape Of Infant Girl: 4 माह की मासूम बनी दुष्कर्म का शिकार, आरोपी को हुई आजीवन कठोर कारावास की सजा
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: जोधपुर में चार माह की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
विस्तार
राजस्थान: जोधपुर में चार माह की मासूम बच्ची के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्मानाभी लगाया है। इसके साथ ही पीड़िता के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उसके नाम 15 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट एफडी कराने का आदेश दिया गया है। विशेष पॉक्सो न्यायालय के न्यायाधीश डॉ. दुष्यंत दत्त ने अपने 66 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में इस अपराध को समाज के लिए अत्यंत चिंताजनक और मानवता को झकझोर देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल कानून का उल्लंघन नहीं बल्कि समाज की संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों पर भी गहरा आघात हैं। क्या था पूरा मामला मामला 14 मार्च 202 का है। पीड़िता के माता-पिता मजदूरी के लिए फैक्ट्री गए हुए थे और चार माह की बच्ची घर में अकेली थी। इसी दौरान आरोपी घर में घुस गया और मासूम के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आसपास के लोगों ने आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पीड़िता के पिता की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष 23 गवाहों के बयान और 53 दस्तावेजी साबुत पेश किए गए। विशिष्ट लोक अभियोजक नरपत चौधरी ने अदालत में सभी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ प्रभावी पैरवी की। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया और कठोरतम सजा सुनाई। पीड़िता के भविष्य की सुरक्षा के लिए विशेष आदेश अदालत ने केवल आरोपी को दंडित करने तक ही स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि पीड़िता के भविष्य को भी ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। न्यायालय ने पीड़िता के नाम 15 लाख रुपये की एफडी जमा कराने का आदेश दिया, जो उसके वयस्क होने तक सुरक्षित रहेगी। एफडी से मिलने वाला मासिक ब्याज पीड़िता की मां को बच्ची के पालन-पोषण और आवश्यक खर्चों के लिए दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी लीगल एड को सौंपी गई है। अपने फैसले में न्यायाधीश ने कहा की इस अपराध को केवल पशुवत कहना भी पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि पशु भी प्रकृति के नियमों के विपरीत ऐसा कृत्य नहीं करते। उन्होंने कहा कि भारत में कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर पूजा जाता है, ऐसे में मासूम बच्चियों के साथ इस प्रकार के अपराध समाज के लिए अत्यंत शर्मनाक हैं।
