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ओडिशा: भुवनेश्वर में बेलगाम रफ्तार और नशे में ड्राइविंग से बढ़ा हादसों का खतरा, आखिर कब रुकेगी लापरवाही?
- Photo by : social media
संक्षेप
ओडिशा: भुवनेश्वर में लापरवाही से वाहन चलाना और लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। खासकर अक्टूबर 2026 के इस सप्ताह में सामने आए कुछ भयावह हिट-एंड-रन और नशे में वाहन चलाने से जुड़े हादसों
विस्तार
ओडिशा: भुवनेश्वर में लापरवाही से वाहन चलाना और लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाएं अब गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। खासकर अक्टूबर 2026 के इस सप्ताह में सामने आए कुछ भयावह हिट-एंड-रन और नशे में वाहन चलाने से जुड़े हादसों ने आम लोगों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आइए नजर डालते हैं कुछ प्रमुख सड़क हादसों पर हाल की प्रमुख दुर्घटनाएं (अक्टूबर 2026 SUM अस्पताल रोड पर सिलसिलेवार दुर्घटना: भरतपुर/कलिंगा स्टूडियो इलाके में एक नशे में धुत चालक की तेज रफ्तार स्कॉर्पियो SUV ने 10 से अधिक वाहनों और सड़क किनारे मौजूद लोगों को टक्कर मार दी। इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। बार-बार नियमों का उल्लंघन: एक कानून के छात्र पर आरोप है कि पहले दुर्घटना करने और जमानत पर बाहर आने के बाद उसने दोबारा शराब के नशे में वाहन चलाया और दूसरे लोगों की जान को खतरे में डाल दिया। कटक-पुरी बाईपास दुर्घटना: इसी तरह कटक-पुरी बाईपास रोड पर भी एक कार ने सिलसिलेवार दुर्घटना को अंजाम देते हुए करीब 7 बाइक को टक्कर मार दी। दुर्घटनाएं बढ़ने के प्रमुख कारणों पर एक नजर शराब पीकर वाहन चलाना (Drink & Drive): राजधानी में रात के समय होने वाले कई बड़े हादसों के पीछे नशे की हालत में वाहन चलाना एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। लापरवाही और तेज रफ्तार: युवाओं में तेज गति से वाहन चलाने और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी की प्रवृत्ति भी सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण है चिह्नित ब्लैक स्पॉट: NH-16 सहित खंडगिरि, पळाशुनी, नयापल्ली और आचार्य विहार जैसे इलाकों में सड़क की खामियां और फुट-ओवर ब्रिज की कमी के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है कैसे रोकी जा सकती हैं ये सड़क दुर्घटनाएं...? जो लोग बार-बार ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते हैं या शराब के नशे में वाहन चलाते हैं, उनके ड्राइविंग लाइसेंस को स्थायी रूप से रद्द करने जैसे कड़े प्रावधान किए जाने चाहिए।
इसके लिए केवल पुलिस या प्रशासन पर निर्भर रहने के बजाय कड़े कदमों के साथ-साथ आम जनता में जागरूकता पैदा करना भी जरूरी है।
कमिश्नरेट पुलिस की ओर से शहर के प्रमुख चौराहों और पार्टी जोन के आसपास ब्रेथ एनालाइजर के जरिए सख्त जांच की जानी चाहिए। राजधानी की प्रमुख सड़कों पर स्पीड कैमरे लगाए जाएं और तेज रफ्तार वाहनों पर भारी जुर्माना लगाया जाए, ताकि लापरवाह चालकों के मन में कानून का डर पैदा हो। वाहन चलाते समय सिर्फ अपनी जिंदगी ही नहीं, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की जिंदगी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है—यह सोच हर नागरिक के मन में होना जरूरी है। राजधानी में लापरवाह ड्राइविंग तभी रुकेगी, जब प्रशासन सख्ती के साथ 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति अपनाएगा और कानून तोड़ने वाले वाहन चालकों के मन में कानून का भय पैदा होगा।
