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उत्तर प्रदेश: श्री लछिराम पीजी कॉलेज में हिंदी दिवस पर भव्य कार्यक्रम, भाषा के सम्मान और संवर्धन का लिया संकल्प

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उत्तर प्रदेश  Published by: ARVIND KUMAR VISHWAKARMA , उत्तर प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 14/09/2026 06:21:42 pm Share:
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  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 14/09/2026 06:21:42 pm
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संक्षेप

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर के श्री लछिराम  महाविद्यालय परिसर में हिंदी दिवस के ऊपर भाषा का सम्मान, संवर्धन और इसके ऐतिहासिक महत्व पर गहन विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उषा यादव  जी के

विस्तार

उत्तर प्रदेश: गाजीपुर के श्री लछिराम  महाविद्यालय परिसर में हिंदी दिवस के ऊपर भाषा का सम्मान, संवर्धन और इसके ऐतिहासिक महत्व पर गहन विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि उषा यादव  जी के द्वारा किया उपस्थित जिसमे छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने  हिंदी दिवस की बधाई दी और भाषा के राष्ट्रीय महत्व पर जोर दिया। हिंदी दिवस का महत्व और राष्ट्रीय पहचान अपने संबोधन में उषा यादव  जी  ने कहा: हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह हर भारतीय के गौरव, संस्कृति और हमारी राष्ट्रीय पहचान का प्रतीक है। भारत विविधताओं से भरा देश है जहाँ कई भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। इन सभी के बीच, हिंदी देश को एकता के सूत्र में पिरोने वाली सबसे प्रमुख भाषा है। हमारी संस्कृति और विचारों की मौलिक अभिव्यक्ति जितनी सहजता से हिंदी में होती है, उतनी किसी अन्य भाषा में संभव नहीं।


उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे दैनिक जीवन और आधुनिक तकनीक के दौर में भी हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। महाविद्यालय परिवार की सम्मानजनक उपस्थिति कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय के  प्रवक्ता श्री मुन्ना सिंह यादव , श्री कैलाश नाथ यादव, श्री संजय राजभर, श्री योगेंद्र नाथ करुणाकर, श्री सुनील मिश्रा , श्री मोती  चंद्र भारती, श्री सत्यप्रकाश चौबे , बंदना कुमारी  ने भी हिंदी साहित्य के इतिहास और हिन्दी भाषा पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने बताया कि 14 सितंबर 1949 को ही संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था, जिसके सम्मान में हर साल यह दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त अध्यापकगण, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने अपनी मातृभाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी के मान-सम्मान को अक्षुण्ण रखने तथा इसके प्रचार-प्रसार में अपना योगदान देने का संकल्प लिया।