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उत्तराखंड: गैस सिलेंडर के लिए जंग जारी, काम-धंधा छोड़ लाइन में खड़े दिखे लोग

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उत्तराखंड  Published by: Likhit Pant , उत्तराखंड  Edited By: Kunal, Date: 18/04/2026 11:56:17 am Share:
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  • Published by.: Likhit Pant ,
  • Edited By.: Kunal,
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  • 18/04/2026 11:56:17 am
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संक्षेप

उत्तराखंड: उत्तराखंड के सीमांत कस्बे गंगोलीहाट में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर पाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं रह गया है। क्षेत्र में गैस की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि आम जनता के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। सु

विस्तार

उत्तराखंड: उत्तराखंड के सीमांत कस्बे गंगोलीहाट में इन दिनों घरेलू गैस सिलेंडर पाना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं रह गया है। क्षेत्र में गैस की किल्लत इस कदर बढ़ गई है कि आम जनता के सब्र का बांध अब टूटने लगा है। सुबह की पहली किरण निकलने से पहले ही, जब शहर सो रहा होता है, तब गंगोलीहाट की जनता गैस की लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार कर रही होती है। ताजा हालात ये हैं कि लोग सुबह 5 बजे से ही गैस वितरण केंद्रों के बाहर डेरा डाल रहे हैं। कतारें इतनी लंबी हैं कि सड़क के एक छोर से दूसरा छोर नजर नहीं आ रहा। हैरानी की बात यह है कि घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि शाम तक चूल्हा जल पाएगा या नहीं।

अव्यवस्था का आलम काम-धंधा छोड़ लाइन में खड़े लोग

गैस की इस किल्लत ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। मजदूरी करने वाले लोग अपना काम छोड़ रहे हैं और घर की महिलाएं अपना सारा कामकाज छोड़ लाइनों में खड़ी होने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि:"गंगोलीहाट में गैस की सप्लाई को लेकर मचे इस घमासान पर जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। क्या जनता की इस परेशानी का कोई समाधान होगा या हमें यूं ही सड़कों पर सुबह 5 बजे से धक्के खाने होंगे?

मुख्य सवाल जो जनता पूछ रही है

सप्लाई चैन में रुकावट क्यों? जब मांग ज्यादा है तो समय पर खेप क्यों नहीं पहुंचाई जा रही? अंधेरे में संघर्ष: सुबह 5 बजे से लाइन लगाना क्या एक सभ्य समाज और प्रशासन की विफलता नहीं है? पिक-अप और वितरण: वितरण प्रणाली में सुधार के लिए स्थानीय प्रशासन कोई सख्त कदम क्यों नहीं उठा रहा?चेतावनी गंगोलीहाट की आक्रोशित जनता का कहना है कि यदि एक-दो दिन के भीतर गैस की आपूर्ति सामान्य नहीं की गई और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी नहीं बनाया गया, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने को बाध्य होगी।