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झारखंड: लार्सन ऐंड टुब्रो सहित बड़े निर्माण कार्यों में अवैध बालू के इस्तेमाल का दावा, प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल

- Photo by : social media

झारखंड  Published by: Surendra Chaubey , झारखंड  Edited By: Yashoda, Date: 27/10/2026 04:52:21 pm Share:
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  • Published by.: Surendra Chaubey ,
  • Edited By.: Yashoda,
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  • 27/10/2026 04:52:21 pm
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संक्षेप

झारखंड: बोकारो जिले में अवैध बालू खनन और तस्करी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि चतरोचट्टी थाना क्षेत्र की केकैया नदी और हुरलूंग स्थित कोनार नदी के घाटों से अवैध रूप से बालू निकालकर विभिन्न निर्माण परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जा रहा है।

विस्तार

झारखंड: बोकारो जिले में अवैध बालू खनन और तस्करी को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि चतरोचट्टी थाना क्षेत्र की केकैया नदी और हुरलूंग स्थित कोनार नदी के घाटों से अवैध रूप से बालू निकालकर विभिन्न निर्माण परियोजनाओं में इस्तेमाल किया जा रहा है। इस मामले में लार्सन ऐंड टुब्रो लिमिटेड के ईसीसी कंस्ट्रक्शन ग्रुप सहित कई बड़ी निर्माण परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित कंपनियों का पक्ष सामने आना बाकी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, झारखंड सरकार के अंतर्गत कोनार डैम में मेगा वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण कार्य चल रहा है। आरोप है कि इस परियोजना के कंक्रीट कार्यों के लिए स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों के माध्यम से नदी घाटों से बालू की आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा, बोकारो जिले से हाईवा ट्रकों के जरिए बालू हजारीबाग में चल रहे भवन निर्माण कार्यों तक पहुंचाए जाने का भी दावा किया गया है।

कई निर्माण परियोजनाओं में अवैध बालू के इस्तेमाल का आरोप

आरोपों में बोकारो जिले के पेटरवार, कसमार और जरीडीह प्रखंडों में चल रही भारतमाला सड़क परियोजना, ओएनजीसी, गेल गैस पाइपलाइन परियोजना, टीटीपीएस ललपनिया, गोमिया में रिलायंस कंपनी के पावर ग्रिड स्टेशन, रेलवे दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही दामोदर घाटी निगम (डीवीसी), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड और रोड कंस्ट्रक्शन डिवीजन के विभिन्न सिविल निर्माण कार्यों में भी अवैध बालू के इस्तेमाल का आरोप लगाया गया है।

हालांकि, इन परियोजनाओं में अवैध बालू के उपयोग की पुष्टि करने वाले दस्तावेज या आधिकारिक जांच रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। ऐसे में आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

मामले को लेकर आरोप लगाया गया है कि अवैध खनन पर कार्रवाई की जिम्मेदारी को लेकर स्थानीय पुलिस, अंचल अधिकारियों, जिला खनन विभाग और पर्यावरण विभाग के बीच समन्वय की कमी है। यह भी दावा किया गया है कि मामला झारखंड सरकार के खान निदेशक तक पहुंच चुका है, लेकिन संबंधित कंपनियों और अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।

यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो इससे राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ खनिज संसाधनों के संरक्षण पर भी गंभीर सवाल खड़े हो सकते हैं।

कोनार नदी के पर्यावरण पर भी चिंता

अवैध बालू खनन के कारण कोनार नदी के अस्तित्व और पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई है। स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि जहां आम लोगों को घर बनाने के लिए बालू प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, वहीं बड़ी निर्माण परियोजनाओं के लिए बालू की आपूर्ति किस प्रक्रिया के तहत हो रही है।
खनिज संसाधनों के संरक्षण और अवैध खनन पर नियंत्रण के लिए संबंधित विभागों की निगरानी तथा कानून के अनुरूप कार्रवाई जरूरी है। अब मामले में प्रशासनिक जांच, बालू की आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों के सत्यापन और संबंधित कंपनियों का पक्ष सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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