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मध्य प्रदेश: बिना बुलाए किसी के घर नहीं जाना चाहिए, चाहे वह पिता का घर ही क्यों न हो: आचार्य गुरू शरण दास शास्त्री

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मध्य प्रदेश  Published by: Ajay Singh Tomar , मध्य प्रदेश  Edited By: Kunal Tewatia, Date: 25/09/2026 11:13:11 am Share:
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  • Published by.: Ajay Singh Tomar ,
  • Edited By.: Kunal Tewatia,
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  • 25/09/2026 11:13:11 am
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संक्षेप

मध्य प्रदेश: बिना बुलाए किसी के घर नहीं जाना चाहिए चाहे वह पिताजी का ही घर क्यों ना हो सती माता के पिता दक्ष के द्वारा यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें शंकर जी को आमंत्रित नहीं किया गया सती जी नहीं मानी और

विस्तार

मध्य प्रदेश: बिना बुलाए किसी के घर नहीं जाना चाहिए चाहे वह पिताजी का ही घर क्यों ना हो सती माता के पिता दक्ष के द्वारा यज्ञ का आयोजन किया गया जिसमें शंकर जी को आमंत्रित नहीं किया गया सती जी नहीं मानी और अपने पिताजी के घर गई वहां उन्हें अपमान का सामना करना पड़ा , अपमान होने पर हवन कुंड में कूदकर  अपने प्राण त्याग दिए तब शंकर जी के गणो  ने यज्ञ को विध्वंस कर दिया इसलिए चाहे वह पिताजी का घर ही क्यों ना हो बिना बुलाए नहीं जाना चाहिए आचार्य गुरू शरण शास्त्र ग्राम हरिहरि पुरा कुरेठा में नाथूराम उपाध्याय के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में आज प्रसिद्ध कथावाचक आचार्य गुरू शरण दास शास्त्री ने अपने प्रवचन में सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों पर गहन संदेश दिए। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।

अपने प्रवचन के दौरान आचार्य शास्त्री ने कहा कि बिना बुलाए किसी के घर नहीं जाना चाहिए, चाहे वह अपने पिता का ही घर क्यों न हो। उन्होंने इसे मर्यादा और संस्कार से जोड़ते हुए बताया कि जीवन में सीमाओं का पालन करना ही धर्म का आधार है।
आज की कथा में उन्होंने कपिल भगवान द्वारा माता देवहूति को दिए गए सांख्य शास्त्र के उपदेश का विस्तार से वर्णन किया। साथ ही सती चरित्र, ध्रुव की अटूट भक्ति, प्रह्लाद की कथा और नरसिंह अवतार के प्रसंगों को भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने सृष्टि के रहस्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संसार मनु महाराज की कृति है। “मनु वही है जिसके पास मन है, और सृष्टि मन से ही उत्पन्न होती है। जो स्वयं को मानव कहता है, वही मनु है,” उन्होंने समझाया।

समसामयिक विषयों पर बोलते हुए आचार्य शास्त्री ने भ्रूण परीक्षण को लेकर भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बिना किसी चिकित्सीय कारण के भ्रूण परीक्षण कराना पाप है। केवल गंभीर बीमारी की स्थिति में ही इसकी अनुमति होनी चाहिए, अन्यथा यह नैतिक और धार्मिक दृष्टि से गलत है। कथा की व्यवस्थाएं  मुरारी लाल, श्रीकृष्ण, कमल किशोर, गिरजा शंकर, उमाशंकर, दिनेश, संतोष, शिवकुमार, मदनमोहन, कृष्ण कुमार, रविकांत, राममोहन, शशीकांत,शेलू,सौरभ, आदि स्थानीय भक्तगणों द्वारा की गईं, जिनकी सभी ने सराहना की। पूरे आयोजन स्थल पर भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा।