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राजस्थान: कपासन में 140 किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों का दिया प्रशिक्षण
- Photo by : social media
संक्षेप
राजस्थान: परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के अंतर्गत कृषकों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों से अवगत कराने के उद्देश्य से मंगलवार को प्रशिक्षण हॉल, कपासन में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विस्तार
राजस्थान: परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के अंतर्गत कृषकों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों से अवगत कराने के उद्देश्य से मंगलवार को प्रशिक्षण हॉल, कपासन में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में योजना के अंतर्गत चयनित 140 कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन सहायक कृषि अधिकारी बालू राम शर्मा द्वारा किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को जैविक खेती के महत्व, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशी तैयार करने की विधि, फसल प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान करना रहा। प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रतनलाल सोलंकी ने जैविक खेती अपनाने के लाभों पर प्रकाश डालते हुए किसानों को मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप खेती करने के लिए प्रेरित किया। वहीं सहायक निदेशक हीरालाल सालवी ने जैविक खेती में वर्मी बेड निर्माण एवं उत्तम वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वर्मीकम्पोस्ट के नियमित उपयोग से मिट्टी की संरचना एवं उर्वरता में सुधार होता है तथा फसलों की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायता मिलती है।
प्रगतिशील किसान सोहनलाल जाट निवासी हथियाना ने जैविक खेती के अपने अनुभव किसानों के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम कर जैविक विधियों को अपनाने से खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ-साथ भूमि की उर्वरता एवं उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है। कृषि अधिकारी प्रशांत कुमार जाटोलिया एवं सहायक कृषि अधिकारी बालूराम शर्मा ने जैविक खेती के दौरान आने वाली विभिन्न समस्याओं, उनके व्यावहारिक समाधान, फसल प्रबंधन तथा कीट एवं रोग नियंत्रण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। सहायक कृषि अधिकारी गोपाल चाष्टा ने कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों से विभागीय योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया।
प्रशिक्षण में किसानों को जैविक खाद एवं जैविक कीटनाशी तैयार करने की विधि, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, फसल प्रबंधन, कीट-रोग नियंत्रण, कृषि लागत कम करने तथा उत्पादन एवं आय बढ़ाने के उपायों की जानकारी दी गई। साथ ही किसानों की कृषि संबंधी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का मौके पर ही समाधान किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक सदाकत हुसैन, पारसमल रेगर, आशा जोशी, मांगीलाल जाट, रतनलाल पुरबिया, कालिका त्रिपाठी, चेतना शर्मा तथा कृषि पर्यवेक्षक रतनलाल गुर्जर, मुकेश जाट, महेश परिहार, सुमित्रा जाट, मीना कुमारी जाट एवं तमन्ना जाट सहित कृषि विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर कृषकों ने प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए प्राप्त तकनीकी जानकारी को अपने खेतों पर अपनाने तथा अन्य किसानों को भी जैविक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। विभागीय अधिकारियों ने कहा कि मृदा की उर्वरता बनाए रखने, खेती की लागत कम करने, पर्यावरण संरक्षण तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए जैविक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
