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उत्तर प्रदेश: बस्ती RTO में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का मामला, सेवा प्रदाता कंपनी के चार कर्मचारियों पर मुकदमा
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) में कथित तौर पर फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने का मामला सामने आने से परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में संभागीय परिवहन कार्यालय (RTO) में कथित तौर पर फर्जी तरीके से ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने का मामला सामने आने से परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले में कोतवाली पुलिस ने सेवा प्रदाता कंपनी के चार कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस और परिवहन विभाग अब पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। वरिष्ठ सहायक (प्रशासन) की ओर से कोतवाली पुलिस को दी गई तहरीर के आधार पर मु0अ0सं0 381/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2), 318(4), 338, 336(3) और 340(2) के तहत चार नामजद कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। चार कर्मचारियों पर केस मुकदमे में सेवा प्रदाता कंपनी से जुड़े कर्मचारी पंकज यादव, प्रवीण यादव, अभय पाण्डेय और सुफियान अहमद को नामजद किया गया है। पुलिस अब आरोपों से जुड़े दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया से संबंधित जानकारी जुटा रही है।प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोप है कि कुछ आवेदकों के ड्राइविंग लाइसेंस की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि कहीं बायोमेट्रिक सत्यापन और अनिवार्य ड्राइविंग टेस्ट जैसी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर लाइसेंस तो जारी नहीं किए गए। मामले की गंभीरता को देखते हुए परिवहन विभाग संबंधित कर्मचारियों की लॉग-इन आईडी से हाल के महीनों में जारी किए गए ड्राइविंग लाइसेंसों का रिकॉर्ड खंगाल रहा है। इस जांच का उद्देश्य संदिग्ध तरीके से जारी किए गए लाइसेंसों की संख्या का पता लगाना और यह निर्धारित करना है कि पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। दलालों और बिचौलियों की भूमिका भी जांच के घेरे में पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कथित फर्जी लाइसेंस जारी कराने में किसी बाहरी व्यक्ति, बिचौलिए या दलाल का नेटवर्क सक्रिय था या नहीं। इसके लिए डिजिटल रिकॉर्ड, आवेदन प्रक्रिया और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि यदि किसी व्यक्ति ने नियमों को दरकिनार कर लाइसेंस बनवाने के लिए कर्मचारियों से संपर्क किया था, तो वह व्यक्ति कौन था और इस पूरे मामले में उसकी क्या भूमिका रही। विभागीय स्तर पर भी जांच मामले में यह भी जांच की जा रही है कि कथित अनियमितता किसी एक-दो मामलों तक सीमित थी या लंबे समय से इस तरह की गतिविधियां चल रही थीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि संबंधित कर्मचारियों के अलावा परिवहन विभाग के किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका तो नहीं रही। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मामले से जुड़े डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश भी दी जा रही है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल पुलिस और परिवहन विभाग की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
